यह एक लघु कथा है जो मैं आज आपके समझ रखने जा रहा हू
एक गोविंदपुर नामक गांव था वहां पर एक स्कूल में सभी विद्यार्थी पढ़ा करते थे स्कूल की स्थिति भी पुराने ग्रामीण क्षेत्रों जैसी थी 1 दिन स्कूल में पंचायत के द्वारा भगवान श्री कृष्ण की कथा कराने का निश्चय किया गया और सभी बच्चों से कहा गया कि वह अपने घर से प्रसाद के लिए दूध लेकर आए उसमें एक बच्चा अपने घर गया और अपनी मां से कहने लगा कि मां आज विद्यालय में कथा है मास्टरजी ने घर से दूध लाने के लिए कहा है वह लोग काफी गरीब थे गाय और बकरी नहीं थी और दूध कहां से आए बार-बार बच्चे के द्वारा दूध मांगने पर मां ने गुस्से से कह दिया कि जाओ जंगल में गोविंद है उनसे ले आओ बच्चा भी खुशी से जंगल की तरफ दौड़ पड़ा और जंगल पहुंच कर गोविंद गोविंद कहकर गोविंद को बुलाने लगा पर कोई नहीं आया तो वह उदास होकर रोने लगा तभी अचानक एक ग्वाला उस बच्चे के पास आया और एक चोकड़िया भर दूध उस बच्चे को दे दिया अब बच्चा खुशी से दौड़ता हुआ सीधे विद्यालय पहुंचा वहां पहुंचकर उसने देखा कि सभी बच्चे बहुत सारा दूध लाए हैं कोई लोटा भर कर लाया कोई बाल्टी भर कर लाया है और वह मात्र एक छोटी सी चुकड़िया भर कर उसने मास्टर जी को दूध दिया तो मास्टर जी और सभी बच्चे उसपर हँसने लगे यह देख कर वह बालक रोने लगा और उदास हो गया यह देखकर एक बुजुर्ग ने कहा इसका भी दूर मिला लीजिए थोड़ा है तो क्या हुआ लाया तो श्रद्धा से है तब मास्टरजी ने उस चुकड़िया का दूध प्रसाद रूपी खीर में मिला दिया जैसे ही वह दूध खीर में मिला खीर उफान मारने लगी और बढ़ने लगी दूसरा वर्तन लगाया गया वह भी भर गया तीसरा लगाया गया वह भी भर गया इसी तरह पूरे गांव के बर्तनों को लगा दिया गया पर खीर का बनना समाप्त नहीं हुआ सब मास्टरजी ने पूछा या दूध तुम कहां से लाए हो तो उस बालक ने बड़े भावुक होकर कहा कि यह दूध मुझे गोविंद ने दिया मास्टरजी ने पूछा कौन गोविंद वही गोविंद जो जंगल में रहते हैं अब सब लोग इस चमत्कार को देखकर हैरान हो गए थे इसलिए गोविंद से मिलने जंगल की ओर चले गए वहां जाकर किसी को कोई गोविंद नहीं दिखाई दिया पर उस बच्चे को केवल गोविंद दिख रहे थे तब मास्टर जी का घमंड टूट गया और वह इस बच्चे को अपने गले से लगा कर रोने लगे बोले की जिसके लिए हम कथा कर रहे हैं वह तुमसे स्वयं मिलने आया ईश्वर भाव का भूखा है क्या बात आज स्पष्ट हो गई
Monday, June 19, 2017
एक चुकड़िया दूध
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment