Saturday, November 24, 2018

स्वप्न के आम


एक बहुत बड़ा जंगल होता था चारो तरफ हरयाली ही हरयाली , जहाँ सभी जानवर बहूत ख़ुशी ख़ुशी  रहते थे ,  और एक दूसरो की बुराइयां भी करते थे और हँसी माजक भी होता था और फिल्मो की बाते भी होती थी ,
वहाँ एक चूहा बड़ा फेमस था जब से उसने ग़जनी की तरह बाल कटावाये यही नहीं एक बंदरिया भी थी ,  जिसके दो बच्चे थे दोनों आवारा बिलकुल , सब जानवर उनसे अपने बच्चो को दूर रखते थे ,सब चल रहा था पूरा जंगल उनसे परेशांन था , कभी किसी को मारते कभी किसी को छेड़ते , जंगल में अपना गैंग बना कर ख़ूब मस्ती करते
शैतानियाँ करते और रात - रात घर भी नहीं आते घर में सब परेशान रहते , अब क्या करे माँ ?
उन दोनों की मित्रता एक हिरन से हो गयी अब क्या एक और हो गया शैतान , खूब उधम करते  बात नहीं मानते किसी की ,पढ़ाई लिखाई से कोई नाता ही नहीं था , एक दिन यह सब जंगल में बहूत अंदर तक चले गए ,वहां की हरयाली को देख कर सब उसमें उछलने लगे कूदने लगे , खेलते खेलते रात होने लगी थी , अब उन लोगो ने वपस चलने को सोचा  और चल पड़े कुछ दूर चलने के बाद वो जहाँ से चलते वही आ जाते ,  अब सब बड़ा परेशान सारी शैतानियाँ भूल गए अब पर करे क्या बड़ी बुरी तरह फंस गए थे ,  अब जंगल धीमे धीमे  काला होता जा रहा था , एक अजीब सी आवाज़ जंगल में फैलने लगी, अब उस सब के पसीने छूटने लगे और अब सारी हेकड़ी निकल गयी ,  दोनों भाई किसी तरह भाग निकले बस उस हिरन को  अकेला ही छोड़ दिया
रात किसी तरह उसने गुजारी अब बड़ी मुश्किल से घर पहुँचा , और सारी बात अपनी माँ को बताई ,अब वो भी क्या करे , उसने यह बात एक बुजुर्ग बंदर को  बतायी और पूँछा की उनको सबक कैसे सिखाये , बहूत शैतान है  उस बूढ़े बंदर ने कहा कि उनको मेरे पास भेजो ।
मै समझता हूँ , जब वो दोनों उसके पास आये तब उस बूढ़े बंदर ने  उनको एक  गुठली दी , और कहा कि यह गुठली एक ऐसे फल की है , जो बहूत मीठा , रसीला है , यह लो उसे ज़मीन को खोद कर उसमे डाल कर  मिट्टी से बंद कर दो ,फल के लालच में उन दोनों ने ऐसा ही किया , एक दिन एक छोटी सी कोपल फूटी  और उसे देख कर बच्चे बड़े खुश हुए , सोचा यह आम की गुठली होगी ,क्योंकि वही रसीला और मीठा फल है ,अब उनको जल्दी से आम चाहिए थे । क्या करे ! रोज देखते कुछ नही निकलता , बाबा के पास जाते बाबा आम कब होंगे ! होंगे इंतजार करो   और खुद को अच्छा बनाओ तब होंगे आम ,  अब उनमे सुधार आने लगा , रोज आम के पास जाते  उसको पानी देते , अब स्वप्न भी आम के आते ।  देखते देखते  पेड़ विशालकाय हो गया पर आम नहीं आये और वो दोनों भी बूढ़े हो गए अब पेड़ पर बहुत से बन्दर रहने लगे थे , क्योंकि कुछ पेड़ पुराने होकर गिर गए थे , तो सब अब उसी पेड़ में  रहने लगे थे  और पेड़ उन दोनों ने लगाया था तो सब  बन्दर उनका बहुत मान सम्मान करते थे , इनकी इज्जत सब करते थे,  सब उनका कहना मानते थे ,  पर वो दोनों आज भी आम का इंतजार कर रहे थे, और कभी कभी बहूत दुःखी हो जाते की उस बाबा ने हमको धोखा दिया है ,  कहा था की इस पेड़ में बड़ा रसीला फल होगा पर कुछ नहीं हुआ, समय बीता एक दिन एक बुद्धिमान बंदर उनको मिला तो उन्होंने सोचा यह ज्ञानी बता सकता ही की इसमें आम क्यों नहीं हो रहे है,   फिर एक दिन उन दोनों ने उस बुद्धिमान बन्दर से पूछा और पूरी कहानी बताई ,  उसने पेड़ देखा कहा इसमें आम नहीं आएंगे क्योंकि यह पेड़ आम का नहीं बरगद का है ,इसमें आम नहीं होंगे , दोनों उदास हो गए  और उस बाबा को कोसने लगे सभी बन्दर उनको उदास देख कर उदास हो गए ,  उस ज्ञानी बन्दर ने देखा और चला गया  और कहा कि समय आने पर बताऊँगा  समय बीता  दोनों बन्दरो में से एक बीमार हो गया , वो ज्ञानी बंदर भी उनको देखने आया , उसने देखा सारे पेड़ के बंदर उसकी सेवा कर रहे है, कोई फल ला रहा है कोई  पानी , कोई कुछ कोई कुछ ला रहा है ,पूरा कुम्बा उसकी सेवा कर रहा था , ज्ञानी बन्दर उस बन्दर के पास गया और कहा कि यह है ! वो मीठा और रसीला फल , जो तुम्हारी सेवा हो रही है यही वो फल है !

(कहते है आप अगर नेक काम करते है , जाने या अनजाने , उसका फल एक दिन जरूर मिलता है)

Sunday, November 11, 2018

Dog biography


स्वानत्मकथा ( DOG BIOGRAPHY)
मेरा जन्म कब हुआ यह नहीं पता मुझे  न समय न दिन पर यह पता है  कि मेरे दो भाई एक बहन है और चौथा मैं सबसे छोटा मैं सड़क के किनारे एक बड़े पानी के पाइप में रहता हूं शायद यहां ही मेरा जन्म हुआ मेरी मां पता नहीं कहां चली जाती है जब लौटकर आती है तभी मेरी भूख-प्यास समाप्त होती कभी-कभी सोचता हूं और दूसरों को देखता हूं तो जलन सी होती है क्योंकि मैं काला हूं और मेरे सभी भाई बहन सफेद  मैं बाहर नहीं जाता माँ कहती है कि मैं बहुत छोटा हूं इसलिए पाइप से बाहर मत जाया करो बाहर बहुत खतरनाक लोग रहते हैं पर मुझे यह दुनिया देखने में अच्छी लगती है जब मेरे भाई बहन जा सकते हैं तो मैं क्यों नहीं यही सोचता रहता और खेलता रहता हूं कभी-कभी हिम्मत भी करता हूं उस पाइप से बाहर जाने की पर इंसानों की वजह से बहुत डर लगता है खाने में मुझे सब पसंद है बस अपने परिवार से दूर जाना नहीं एक दिन मैं बैठा हुआ मां का इंतजार कर रहा था मां आई तो पता चला मेरे एक भाई को एक इंसान की गाड़ी ने कुचल दिया और वह मर गया कितनी सस्ती जिंदगी होती है हमारी यह मैं मां से अक्सर पूछता और वह कुछ जवाब नहीं देती और मुस्कुरा कर चली जाती है मैं भी धीरे-धीरे बड़ा हो रहा हूं दुनिया की समझ आ रही है सबसे खुशी की बात तो यह है कि अब मेरी पूछ भी बड़ी हो गई है और मैं जिस तरह से चाहता हूं उसको हिला लेता हूं सबकी खुशबू तो मेरे नाक में बस गई है अब मां ने भी कह दिया कि तुम बाहर जा सकते हो क्या मैं बड़ा हो गया हूं पता है आज खुशी का दिन है आज मैं बाहर इस दुनिया को देखूंगा मां कहती है इस दुनिया का सबसे बड़ा खतरनाक जानवर इंसान है उससे बचकर रहना अब मुझको इंसान को भी देखना है कैसा लगता है क्या उसके भी पूछ होगी या नहीं क्या उसके भी मेरी मां की तरह बड़े बड़े दाँत होंगे पता नहीं पर कल सुबह देख लूंगा कि इंसान भी कैसे लगते हैं अब रात भर मुझे नींद नहीं आ रही सुबह का इंतजार है यह चांद भी धीमे धीमे नीचे जाने की बजाए चढ़ता हुआ नजर आ रहा और यह सोचते सोचते ना जाने कब मेरी नींद लग गई और सुबह हो गई सुबह होते ही खुशी के कारण है मेरी पुंछ हिलना शुरू हो गई और वह बंद नहीं हो रही है बाहर जाऊंगा देखूंगा सबको फिर मैं इस पाइप में कभी नहीं आऊंगा पक्का है मैंने जब बाहर एक कदम बढ़ाया तो मुझे बहुत अच्छा लगा मेरे चारों पैरों के नीचे गुदगुदी सी हरी हरी घास मन करा कि लेट जाऊं और मैंने दो-तीन गुलाटियां मार ही ली पर मुझे आज ही सब कुछ देखना है इसलिए आज कुछ नहीं करुंगा केवल इंसानों से मिलूंगा देखूं क्या वह मुझसे भी खतरनाक है तभी मुझे एक बड़ा सा इंसान आता हुआ दिखा मां ने कहा चलो अंदर जल्दी से मैं चुपके से पेड़ के किनारे से उसे देखता रहा और सोचा यह कितना अजीब है ना इसकी अच्छी सी नाक है दांत भी इतने छोटे छोटे से हैं कान भी छोटे से हैं और सबसे बड़ी बात पूछ तो है ही नहीं बिना पूछ कोई जिंदगी होती है कैसे रहते  यह लोग रहते हैं जब गर्मी लगती होगी तब क्या करते होगे जब खुश होते होंगे तब क्या करते होंगे अच्छा हुआ हम कुत्ते हैं कम से कम पूंछ तो है अब मैं पार्क में घूमने लगा घूमते-घूमते मुझे मेरे जैसा एक काले सफेद रंग का कोई दिखा मैं उसके पास जाना चाहता था पर कोई इंसान उसे लेकर चला गया । कहां गया इंसान को काट खाता और मेरे पास आ जाता मां ने आज कहा कि मैं आज खाने की तलाश में उनके साथ चलु मैं और भी खुश हूं मां खाना बनाती कहां पर है यह मुझे देखना है मैं मां के पीछे धीमे धीमे चलने लगा इंसानों के बीच से निकलता हुआ किनारे किनारे चलता रहा मां ने बताया किस काली सी दिखने वाली लाइन मैं मत जाना इसको सड़क कहते हैं इसमें बड़ी खतरनाक गाड़ियां निकलती है इस सड़क नहीं तुम्हारे भाई को मारा है अब मुझे इससे बड़ा डर लगने लगा मां से पूछा मैं इस को बनाया किसने इंसान ने क्या हमें मारने के लिए । नहीं या नहीं पता पर हो भी सकता है मैं आगे चलता रहा तभी एक बड़ा सा काला दब्बा दिखाई दिया मां ने मुझे बुलाया और उसमें अंदर आने के लिए कहा मैं भी उछल कर अंदर चला गया मैंने देखा वहां ढेर सारा खाना था मैं खाना खाने लगा साथ में मेरे सभी भाई बहन मेरा पेट भर गया हमें वापस आया और मैंने देखा कि एक इंसान मेरे जैसे एक कुत्ते को लिए अपने साथ ले जा रहा है और उसे खूब प्यार कर रहा है मैंने मां से पूछा मां यह इंसान हमको क्यों नहीं प्यार करते मां ने जवाब दिया पता नहीं और लौटकर हम लोग पाइप में आ गए मैं रातभर इंसानों के बारे में सोचता रहा कि इंसान अच्छे भी होते हैं अगर अच्छे होते तो मेरे भाई को क्यों मारते अब मेरी तलाश इंसानों के ऊपर थी और मैं यह जान कर रहूंगा कि इंसान होते कैसे हैं सुबह सुबह मेरी नींद अचानक टूट गई मेरी मां किसी पर चिल्ला रही थी मैं बाहर निकला तब मैंने देखा एक अजीब सा जानवर पेड़ पर बैठा था और मेरी मां उसको जाने को कह रही थी और चिल्ला रही थी मैं दौड़कर मां के पास गया और उसको चिल्लाने लगा उस पर भौंकने लगा मेरी मां  ने मुझे छुप जाने के लिए कहा पर मैं नहीं माना मैंने पूछा यह है कौन मां ने कहा यह इंसानों के पूर्वज मतलब मतलब कि इंसान उन से बने हैं यह बंदर है इसका मतलब इंसान किसी को नहीं होते जब उन्होंने अपने इस ताऊ जी को बाहर निकाल कर पेड़ पर बैठा दिया तो फिर वह हमें कैसे प्यार करेंगे मैंने उसको बड़े गौर से देखा उसका चेहरा कुछ कुछ इंसानों से मिल रहा था फिर उसकी एक बड़ी सी पूछ थी वह भी काला था मैं सोचने लगा शायद इंसानों की पूछ जब निकल आती है तब वह आपस में लड़कर सबको भगा देते हैं और फिर वह ऐसे ही पेड़ में रहने लगते हैं मैं भी अब अपनी जिंदगी से खुश होकर घूमने लगा कि मेरे पास सब कुछ है किसी चीज की कमी नहीं अब किस चीज की तलाश नहीं है पर मुझे इंसानों के बारे में और जानना है इसलिए मैं इस खोज पर निकल पड़ा अकेला कुछ दिनों में मैं अपने जैसे कई लोगों से मिला पर वह सब झगड़ालू थे मैं घर से बहुत दूर आ गया था और मैं अकेला चलता जा रहा था फिर एक पेड़ के किनारे बैठ कर पेड़ के सामने एक बहुत बड़ी इमारत थी उस इमारत पर मेरे जैसे ना जाने कितने पूछ वाले जानवर थे मेरा मन सब से मिलने को करता पर सभी बहुत घमंडी थे कोई मुझसे बात नहीं करता वह लोग शायद इंसानों के साथ रहकर ऐसे हो गए लेकिन एक इंसान ने मुझे रोटी देना शुरू कर दिया मुझे वह भी बहुत अच्छा लगता था वह भी उस बिल्डिंग के बाहर एक छोटी सी कुटिया में रहता मैं भी उसके साथ रहने लगा और इंसानों के बारे में मेरी राय अब बदलने लगी थी कि इंसान गलत होते हैं खतरनाक होते हैं हम दोनों खूब बातें करते खूब मस्ती करते हैं और सुबह शाम घूमने जाते खाने की तो कमी नहीं थी जो मन हो वह खाओ जहां मन हो वहां जाओ वह भी शायद बुड्ढे थे इसलिए ज्यादा खेलते नहीं थे शायद उनके भी पूछ निकलने वाली थी इसीलिए इंसानों ने उन्हें अपने से दूर कर दिया था एक दिन मैंने देखा की एक इंसान एक सफेद पूछ वाली प्यारी सी लड़की को लेकर एक पेड़ के पास बांध कर चला गया वह लड़की उसका इंतजार करती रही पर वह नहीं आया सुबह से शाम हो गई क्या इंसान ऐसे भी होते हैं मैंने उसके  पास जाने की कोशिश की तो उसने मुझ पर चिल्लाना शुरु कर दिया मैं भाग कर अपने मालिक के पास आ गया और उससे उस सफेद पूछ वाली के बारे में बताने की कोशिश करने लगा मेरा मालिक मेरे साथ चलकर उसके पास गए तो मैंने देखा उसके शरीर पर अनेक घाव थे और वह उसको साफ कर रही थी हम लोग उसको अपने साथ ले आए और उसके घाव का इलाज किया उसकी पूंछ झड़ गई थी वह बोलती नहीं थी पता नहीं क्यों शायद उसको इंसानो के द्वारा सदमा लगा होगा पर उसको नहीं पता कि कुछ इंसान अच्छे भी होते हैं लेकिन पता नहीं कौन वाले शायद जिनकी पूंछ निकलने वाली होती होगी वह अच्छे हो जाते होंगे पता नहीं धीरे-धीरे वह भी हम से बोलने लगी हम सब साथ में खेलने और खाने लगे एक दिन मेरे मालिक को पता नहीं क्या हो गया वह कुछ बोल नहीं रहे थे शायद उनकी पूछ निकलने वाली थी इसलिए कुछ इंसान आए और उनको लेकर चले गए आपस में बोल रहे थे कि उनकी मृत्यु हो गई मैं सोचने लगा अभी तो पूछ निकालनी बाकी है तो मर कैसे सकते हैं  तब हम दोनों उदास होकर बैठ गए 2 दिन तक बैठे रहे फिर वहां के चौकीदार ने हमको भगा दिया मेरे पैर में तो चोट भी आई अब हम वापस अपने घर के लिए निकल पड़े घर पहुंचकर देखा कि मेरी मां और मेरी एक बहन बची है मैंने अपनी मां से अपने भाई के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा क्यों उसको इंसानों ने जेल में डाल दिया है शायद वह कभी वापस नहीं आएगा अब मैं इंसानों के बारे में सोचने लगा कि कितने अजीब होते हैं जब वह आपस में ही सही नहीं रहते तो हमारे लिए क्या करेंगे इंसान मतलबी होते हैं इसलिए हम अपने सारे परिवार के साथ जंगल की तरफ निकल गए वहां कई पूछ वाले इंसानों के ताऊ चाचा बाबा थे शायद वह मरने से बच गए होंगे

Tuesday, August 14, 2018

सूरज के घोड़े १

यह काल्पनिक कहानी है अगर इसका कहीं किसी कहानी से मेल होता है क्या किसी लघु कथा संबंधित है तो इस विषय में हमें नहीं पता क्योंकि यह मेरे  मन की एक काल्पनिक उपज है

ईश्वर ने जब धरती को बनाया और उसमें छोटे छोटे जीवों का अवतरण हुआ तब उसने सोचा नहीं होगा कि इंसान इतना बुद्धिमान हो जाएगा कि वह उसके विषय में ही चिंतन करने लगेगा और नई-नई खोजें कर उसके होने तथा ना होने के विषय में शोधकर्ता करता रहेगा

यह बात उस समय की है जब धरती की शुरुआत हुई तथा इस दहकते हुए गोले में जीवों का प्रारंभ हो गया  पेड़ बन गए कोपले फूट गयी और प्रकृति ने अपना रंग बिखेरना प्रारंभ कर दिया हरे-हरे पहाड़ों से गिरी हुई घाटियां लाल पीले पुष्पों से रोशन जब भी सूर्य की रोशनी पड़ती तो ऐसे चमकती जैसे पूरा इंद्रधनुष जमीन पर उतर आया और उसी समय इंसानों का आगमन हुआ इंसान तो बुद्धिमान था तो उसने नए नए प्रयोग प्रारंभ किए बलशाली व्यक्ति राजा बन गया कमजोर प्रजा बन गयी बुद्धिमान व्यक्ति राजा के सेवक बन गए और प्रजा का जीवन चलने लगा पर प्रकृति का नियम है की दुख के बाद सुख और सुख के बाद दुख आना ही है और ऐसा ही होना ही चाहिए क्योंकि बदलाव ही संसार का नियम है कुछ राजा अच्छे भी थे कुछ बुरे भी बुराई हमेशा ही जीती आई है हां हां अंत समय भले ही उसे हार मिले पर उस का प्रथम प्रहर हमेशा ही अच्छाई को तोड़ने के लिए काफी रहता है और ऐसा ही हुआ वहां राजा के का हाल दूसरे राजा ने आक्रमण कर दिया और सब कुछ लूट कर राजा को बंदी बनाकर कारागार में डाल दिया पर इस बदलाव से प्रजा खुश नहीं थी पर क्या करते हैं उसके पास तो क्षमता ही नहीं थी कि वह किसी से लड़ पाए पर समय चक्र जो है वह बहुत तीव्र होता है समय बदला वही प्रजा में एक लकड़हारा रहता था उसका एक पुत्र था तथा उसकी माता राजा के महल में कार्य करती थी लेकिन जब से दूसरे राजा ने आक्रमण कर दिया था उसकी मां लापता हो गई थी जिस कारण पिता और पुत्र अत्यंत चिंतित रहते थे पर पुत्र अपनी मां से मिलने की लालसा में अनेकों जतन करता कि वह किसी तरह महल पहुंच जाए और अपनी मां की खोज करें और एक दिन वह किसी तरीके महल जाने वाली बैलगाड़ियों में छिपकर महल के अंदर पहुंच जाता है और धीरे-धीरे वह अपनी मां की तलाश करने लगता है पर काफी समय तक तलाश करने के बावजूद भी उसकी मां का पता नहीं चलता और रात भी हो जाती है रात हो जाने के कारण पिता उसके चिंतित होते हैं कि उनका पुत्र किधर चला गया रात में वह अपनी मां की तलाश जारी रखता है चिपका हुआ एक कमरे से दूसरे कमरे सैनिकों से बस्ता बचता बचाता किसी तरीके कारागार के पास पहुंच जाता है के पास पहुंचने पर
उसे पता चलता है कि उसकी मां का राजा ने कत्ल करवा दिया क्योंकि वाह वहां कार्य नहीं करना चाहती थी यह सुनते ही उसका पुत्र जोर जोर से रोने लगा और बाहर की तरफ भागने लगा और उसे भागते समय राजा के सैनिकों ने देख लिया कुछ समय पश्चात उन सैनिकों ने उसको पकड़ लिया आओ और राजा के समक्ष प्रस्तुत किया पुत्र अपनी मां की मृत्यु से इतना कुपित था कि कि उसने राजा के ऊपर प्रहार करने की कोशिश की जिससे राजा ने क्रोध में आकर उसको जंगल में किसी गुफा में बंद करने का आदेश दिया दूसरी सुबह राजा के सैनिकों ने उसको ले जाकर किसी अनजान गुफा में बंद कर दिया और वहां से चले गए वह अकेले उस गुफा में बाहर निकलने के साधन खोजने लगा और कभी हाथों से जमीन को खोदता कभी कभी पत्थर को धकेलता कभी ऊपर की तरफ़ पत्थर मारता  पर उसको रास्ता नहीं दिखाई देता काफी देर तक बंद रहने के बाद फिर से रात आ गई वह रात में बैठा ही था क्यों उसे अचानक एक जगह एक छोटी सी रोशनी दिखाई दी उसने उस रोशनी को हाथ से छुआ और उसे उसे खोजने लगा तब उसे एक घड़ा नुमा आकृति का बक्सा दिखा जिसको खोलने पर उसमें एक छोटी सी सफेद मोती दिखाई दी उस मोती को उसने हाथ मे लिया तो वह फूट गयी और उसमें से एक  छोटी सी परी निकली  वह उसको देख कर डर गया । फिर उस परी ने कहा कि डरो मत मैं अपनी कहानी बताती हूं उसमे अपनी कहानी बताई की किस तरह वह यहां आयी ।
बच्चे ने भी अपनी पूरी कहानी परी को बताई की उसको माँ से मिलना है परी ने कहा कि मैं मदद करुँगी।
फिर परी ने बताया मैं एक सुंदर  स्वप्नलोक की एक परी हु मेरे राज्य में सारे लोग बहुत ही छोटे और प्यारे है पर एक दिन वो सारे लोग बुरे हो गए और आपस मे लड़ने लगे तब मेरी माँ ने मुझे मोती बना दिया और छिपा दिया मैं वापस भी वापस जाना चाहती हूँ तुम मेरी मदद करो मैं तुम्हारी करुँगी, उस छोटी सी पारी ने जादू किया अब दोनों लोग गुफा से बाहर आ गए  और परी के घर की खोज में निकल पड़े , खोजते खोजते जब वो घने जंगल मे पहुँचे तो उनको एक अजीब से गुघराले बालों वाला पेड़ दिखा उसमे एक गुप्त दरवाजा था वो दरवाजा परी ने खोला पर वो बहूत छोटा था । अब परी ने उस लड़के को छोटा बना दिया दोनों लोग स्वप्नलोक की ओर निकल पड़े रास्ते मे उनको छोटे छोटे पहाड़ दिखे वो लोक आपकी इच्छा को सामने लाने वाला था जो माँगो सामने जो सोचो सामने आ जाता था । जब वो लोग परी के गाँव पहुँचे वहाँ पर सब अंधेरा अंधेरा था लोग काले हो गए थे अब सब अजीब था अब परी अपने परिवार की खोज करने लगी तब उसने अपनी बहन को देखा उसके पँख काले हो और वो डरावनी हो गयी है । आगे जाकर उन्हें एक गुप्त मंदिर दिखा जहाँ एक बहूत पुरानी चीजे पड़ी थी उसमें से एक किसी परी का पँख था उसमें लिखा था जब घोड़े वापस आयेगे तब सब सही होगा उनको वापस लाओ । घोड़ो की तलाश में दोनों लोग निकल पड़े बहूत खोजने के बाद उनको एक गुप्त गुफा मिली जिसके अंदर एक काली परी रहती थी वो घोड़े को चोरी करने से सफेद हो गयी थी जब वो लोग गए तब वो सो रही थी । तब उस बच्चे ने पहली बार सूरज में घोड़ो को देखा यह वो घोड़े है जो हर इच्छा पूरी कर सकते परी ने कहा उस लड़के ने काली परी की जादुई छड़ी तोड़ दी और छोटे छोटे घोड़ो को आजद कर दिया फिर वो स्वप्नलोक पहले की तरह हो गया । तब परी ने एक घोड़ा लड़के को दिया और बोली इसको लेकर जाओ और अपनी माँ को वापस ले आओ वो घोड़े में सवार होकर निकल पड़ा और उड़ता हुआ एक दिव्यलोक में पहुँचा जहाँ सब मरे लोग आ रहे थे कई जा रहे थे अब वो वहाँ अपनी माँ को खोजने लगा तब उसको उसकी माँ एक पेड़ के नीचे दिखी और अपनी माँ से मिलकर बड़ा खुश हुआ और उनको उस घोड़े में बिठाकर वापस ले आया और खुशी से रहने लगा ।