Thursday, January 16, 2020

पेड़ का भूत

एक बहुत पुराना बंगला वीरान ही रहता था लोग कहते थे कि उस बंगले में जो आम का पेड़ है उसमें कोई भूत रहता है कई लोगों ने वहां पर उस भूत को चलते फिरते देखा इसलिए वहां पर कोई रहने नहीं आता है आपस में कुछ बंगले की बातें करते रहते थे !!!।

पर कुछ ही समय पहले उस बंगले में मीनू नाम की लड़की अपने परिवार अपने के साथ रहने आई !!!
 वहां के लोगों ने मीनू के पिताजी से उस बंगले में रहने के लिए मना किया पर वह नहीं माने और कहते कि भूत प्रेत कुछ नहीं होता !!!
 उस बंगले में मीनू भी खूब मस्ती करती खूब कहानियां सुनती !!!  अपनी मम्मी से !

कुछ समय बाद पास के ही स्कूल में मीनू ने दाखिला ले लिया !! मीनू के हंसमुख स्वभाव के कारण उसकी बहुत सी सहेलियां बन गई लता वीवो उनमे सबसे ख़ास थी एक दिल लता मीनू को  अपने घर ले गई
लता - मीनू आज घर मे खूब खेलेंगे वीवो भी आती होगी 
मीनू - वीवो का घर कहाँ है !!!!
लता - वो बगल वाला ॥॥
लता की मम्मी - मीनू और लता बेटा पहले कुछ खा लो फिर खेलो !!!
लता - हा मम्मी आयी!!!

 मीनू ने कहा  - क्यों ना तुम मेरे घर भी आओ मेरे मम्मी बहुत अच्छा पास्ता बनाती हैं 
 लता - तुम्हारा घर  कहां पर है।  ?

मीनू-  पुरानी हवेली नहीं है उसी में  रहती हूं मैं 

लता-  मेरी मम्मी कहती है कि उस हवेली का एक आम का पेड़ है उस पर में भूत रहता है

 मीनू - सच्ची 
 लता - हां माली बाबा भी कहते हैं की वहां मत जाया करो तुम भी मत जाना उस पेड़ के पास !!!!
मीनू यह सुनकर डर गई और वह जब घर आई तो तब उसने अपनी मम्मी से कहा!!!!!!

 मम्मी ने कहा-  नहीं बेटा वह मजाक कर रहे हैं यहां पेड़ में कोई भूत नहीं रहता

 कुछ दिनों बाद मीनू चोरी से उस पेड़ के पास गई तो उसने देखा वहां एक छोटा बच्चा रो रहा था मीनू उसके पास गई!!

मीनू-  तुम कहां रहते हो उसने कहा इस पेड़ में मीनू अच्छा बॉल खेलोगे मेरे पास बॉल हैं आओ दोनों लोग खेलते हैं  
कुछ ही दिनों में मीनू की बच्चे से दोस्ती हो गई और दोनों लोग  साथ खेलने लगे पर और साथ रहने लगे मीनू भी साथ में खेलती और खूब मस्ती करती !!!!
मीनू ने स्कूल में अपनी सहेली लता और वीवो को भी बताया कि मेरा एक और दोस्त है वो हवेली में रहता है बहुत अच्छा है। 

 एक दिन लता और वीवो मीनू से मिलने उसके घर आई !!

मीनू - आज तुमको अपने नए दोस्त से मिलाते हैं उसका नाम टुकटुक है वह आम के पेड़ में रहता है उसमें कोई भूत नहीं वहाँ तो केवल टुकटुक रहता है वह मेरा दोस्त है 

जब विवो और लता उस पेड़ के पास गए तो टुकटुक केवल मीनू को दिख रहा था और किसी को नहीं यह देखकर दोनों बच्चे भाग गए और मीनू की मम्मी से शिकायत करने लगे ।!!!

लता - आंटी  मीनू ने भूत से दोस्ती कर ली है !!!! 

और लता और वीवो ने मीनू से दोस्ती तोड़ ली !!!
अब मीनू से स्कूल में कोई नही बात करता मीनू उदास रहने लगी !!!
और अब जब मीनू स्कूल जाती तो वहां के बच्चे मीनू को चिढ़ाते की इसका दोस्त भूत है इससे मत बोलो यह सुनकर मीनू और उदास हो जाती!!!!

 एक दिन मीनू उदास होकर रो रही थी तभी टुकटुक पास आया बोला !!!!

टुकटुक - मीनू क्यों रो रही हो !!

मीनू - टुकटुक कुछ नहीं ! स्कूल के बच्चे  मुझे चिढ़ाते हैं कि तुमने भूत से दोस्ती कर ली है 

टुकटुक -  उदास मत हो रो मत मैं कुछ करता हूं!!!

 दूसरे दिन टुकटुक मीनू के साथ स्कूल जाता है और जो बच्चा मीनू को चिढ़ाता है उसको अपने जादू से गायब कर आम के पेड़ में टांग देता है!!!! 
अब सब मीनू से डरने लगे !!!,
इस तरह बच्चे गायब होने लगे सबके सब के परिवार पेरेंट्स  मम्मी पापा अपने - अपने बच्चों को खोजते खोजते मीनू के घर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि उनके बच्चे बेहोशी की हालत में आम के पेड़ में टंगे हुए हैं !!
उन्होंने मीनू की मम्मी को  बुलाया   !!!!

मीनू की मम्मी - यह क्या  तब मीनू ने सारी बात उनको बता दी!!!!

 मीनू - ने  टुकटुक से कहा कि तुम इन सारे बच्चों को छोड़ दो यह सब हमारे स्कूल के साथी हैं!!!

 टुकटुक में मीनू की बात मानी और सारे बच्चों को छोड़ दिया फिर!!

  मीनू की मम्मी ने मीनू  से  टुकटुक को  बुलाने के लिए कहा!!!

 मीनू - आवाज दी !!! टुकटुक - टुकटुक !!!!

टुकटुक सामने आ गया!!!!  पर वह मीनू की मम्मी को नहीं दिख रहा था???

  मीनू -  टुकटुक प्लीज मम्मी को भी दिखाई दो फिर टुकटुक  मीनू की मम्मी को भी दिखने लगा !!!!! 

मीनू के मम्मी ने पूछा -  टुकटुक तुम इस तरह कैसे बन गए  तुम्हारे साथ क्या हुआ???

  टुक टुक-   मेरी मम्मी पापा कार एक्सीडेंट में  मर गए थे  मैं अकेला  इस घर में  था  !!! दादी के साथ !

एक दिन कुछ चोर चोरी करने आए  क्योंकि घर में मैं मेरी दादी थी उन लोगो ने मेरी दादी को मार दिया !
 मैंने देखा और मैं ऊपर जाकर खिड़की से कूद गया और इस आम के पेड़ नीचे गिरकर मर गया !!!  
 पता नहीं कब मैं !!!
और इस आम के पेड़ में ही रहने लगा मैं बहुत दिनों तक अकेला रहा मुझे कोई साथी नहीं मिला ना मुझसे कोई बात करता था ना  , मेरे साथ कोई खेलता था  , ॥॥ 
अब मैं मीनू के साथ खेलता हूं मुझे अच्छा लगता है  !!

मीनू की मम्मी -  कोई बात नहीं  तुम मीनू के अच्छे दोस्त हो दोनों लोग खेलो और जो मन हो करो !!!!

फिर एक कुछ दिन बाद मीनू की मम्मी  एक साधु बाबा के पास गई उन्हें पूरी बात बताई !!!!

बाबा -    उस बच्चे की आत्मा को उस पेड़ से आजाद करना होगा इसके लिए तुमको उस पेड़ की एक लकड़ी के टुकड़े को यहां लाना होगा !!!!!

मीनू की मम्मी-  दूसरे दिन पेड़ की लकड़ी के टुकड़े को लेकर बाबा के पास गयी !!!!

 बाबा-  मैं इस पेड़ की लकड़ी के टुकड़े पर अपना मंत्र  करता हूं और मंत्र द्वारा इसे उस लड़के को मुक्त करने के लिए बनाता हूं !!!!

मीनू की मम्मी - जी बाबा!!!

मीनू की मम्मी को बाबा ने वह लकड़ी दी  -  कहा की रात में उस पेड़ के नीचे जाकर कुछ लकड़ी को गाड़ कर जला देना जिससे उस लड़के की आत्मा   को मुक्ति मिल जाएगी और वह इस दुनिया से चला जाएगा!!!

 कभी किसी को परेशान नहीं करेगा !!

मीनू की मम्मी - जी बाबा  धन्यवाद !!

घर आकर मीनू की मम्मी ने वही किया जो बाबा जी ने कहा था !!!
यह करने के बाद टुकटुक पेड़ से बाहर निकला और आसमान  की तरफ हाथ के इशारे से टाटा करते हुए उड़ गया या देखकर मीनू हंसते हुए बाय बाय करती रही!!! 
 
!!!

Sunday, December 29, 2019

भूतिया कुआँ और जादुई फ़ल

भूतिया कुआँ और जादुई फ़ल ( भाग १)
गोपाल नगर  नाम का एक नगर था । वहाँ के सभी लोग बहुत अच्छे और सच्चे थे ,
गोपाल नगर के राजा वीर सिंह अपनी प्रजा को बहुत प्रेम करते थे और उनकी रानी उमा भी प्रजा के बीच अपने उदार और दानी स्वाभव के कारण राज्य के सभी लोग उनको अपनी पलको पर रखते थे, पर उनके कोई संतान नही जिसके कारण राजा रानी दोनों दुःखी रहते थे एक दिन उस नगर में एक महात्मा आये ।
महात्मा जी - (सैनिको से) यह राज्य तो बड़ा सुंदर है
सैनिक-  जी महाराज यहाँ एक राजा और रानी भी बहुत अच्छे है ।
महात्मा जी - मुझे राजा के पास ले चलो ।
सैनिक - जी महाराज !!!!!
महल के अंदर जाकर
राजा - स्वगत है आपका महात्मा जी हमारे राज्य में !
महात्मा जी - मैं तुम्हारा अतिथियों के प्रति प्रेम देखकर बड़ा खुश हुआ हूं ।
कोई वर माँगो मैं आज तुमको दूँगा!
राजा  - थोड़ा सोचने के बाद
राजा के सैनिकों को जाने के लिए कहा !!  सब सैनिक चले जाते है
राजा - महात्मा जी मैं बहुत ही दुःखी हू मेरी कोई भी संतान नही है
महात्मा- राजन दुःखी न हो मैं तुमको एक उपाय बताता हूँ । जिससे आपको संतान सुख आवश्य मिलेगा ।
राजा ( हाथ जोड़कर )- जी महाराज । आपकी महान दया होगी।।।।
महात्मा - राजन इस राज्य के बाहर जो जंगल है उसमें एक पेड़ है जो सफेद रंग का है अमावस्या की रात को उस पेड़ के फल को ले कर आओ वो फल चमकीला होगा जैसे अंधेरी रात में चाँद चमक रहा हो  और वो फल अपनी रानी को खिलाओ तुमको संतान अवश्य होगी ।
राजा - यह कैसा पेड़ है महाराज।।।
महात्मा-  जब किसी राज्य में किसी बालक की मृत्यु हो जाती है तब उसकी आत्मा  एक रात के लिये फल बन जाती है उस पेड़ में ! और उस पेड़ के फल के द्वारा भूत- चुलैड को संतान की प्राप्त होती है।
राजा - जी माहराज !
महात्मा - पर ध्यान रहे चुड़ैलो की भी नज़र उस फल में रहती है उनसे पहले वो तुमको लाना होगा ।
महात्मा जी - अब आज्ञा दे राजन यह कह कर चले जाते है! !!
फिर वो अमवस्या की रात आती है
रात में राजा घोड़े पर सवार होकर जंगल की ओर निकल पड़ता है आगे चल कर राजा देखता है कि जंगल के बीच में एक विशालकाय वृक्ष है जिसका फल अत्यंत ही चमकीला है जैसे किसी ने चांद को तोड़ कर वहां लगा दिया हो ।
जब राजा वृक्ष  के करीब पहुचता है तब उसे  दिखाई देता है कि बहुत सी चुलैड  भूत प्रेत उस फ़ल के इंतजार में नीचे बैठे हैं की वह फल गिरे और वह उसे खा कर खुद की संतान प्राप्त कर लें अब राजा झाड़ियों के बीच छुप जाता है ।
राजा फल पाने का उपाय सोचने लगता है - किस तरह इस फल को तोड़ लू!
तभी राजा को एक तरकीब सूझती है वह अपना धनुष बाण निकाल कर तीर को इस तरह चलाता है किस फल उस में फंस कर दूर कहीं चल गिर जाता है ।
अचानक फल के गायब होने से वहां बैठे भूत प्रेत और चुड़ैल अचंभे में आ जाती हैं और तुरंत गायब हो जाती है।
उन सब के चले जाने के बाद राजा फ़ल को ढूंढने लगता है और तब उसे झाड़ियों के बीच वह चमकदार फल मिल जाता है और वह तेजी से फल लेकर अपने राज्य की ओर निकल पड़ता है
राज्य पहुंचकर राजा फल अपनी रानी को देते हैं और कहते हैं
राजा- यह फल खा लो जिससे हम लोगों को संतान का सुख प्राप्त हो जाएगा।
रानी - यह कैसा फल है ? इतना चमकदार
राजा - इसे खा लो !!
रानी फल लेकर उसे खाने के बजाय उसे बाद में खाने को कहकर रख लेती है।
और बाद में जब रानी उस उस पल को देखती है और जब वह फल उसे अजीब सा लगता है
रानी पल को देख रही होती है तभी उसे उस पल में एक बच्चे की शक्ल दिखाई देती है रानी घबरा जाती है और उस फल को महल के कुएं में फेंक देती है
राजा - फल खा लिया
रानी - हा महाराज
फल को कुएं में फेंकने के कारण कुँए में बच्चे की आत्मा आ जाती है और रात में बच्चे के रोने की आवाज़ आती है  और पूरे महल में गूंजने लगती थी जिससे महल के सभी लोग घबरा जाते थे !
बात में क्योंकि उस कुएं के पानी का इस्तेमाल महल में होता था उस पानी को जो भी पीता उसका शरीर अजीब सा दिखने लगता शरीर मे काँटे निकल आते  और धीरे-धीरे वह अंग गायब हो जाता और अंत मे पूरा शरीर , इस तरह महल के सभी लोग गायब होने लगे ।
जब राजा को इस बात का पता चला तो आप बहुत घबरा गया उसने उस कुए को बंद करने का आदेश दे दिया । पर तब तक उस कुँए का पानी रानी पी चुकी थी जिस कारण उसका भी  शरीर धीरे धीरे गायब होने लगा यह देखकर राजा बहुत घबरा गया।
राजा -सोचने क्या करूँ । रानी को क्या हो गया ।
तब उसको उन साधु का ध्यान आया जिसने फल के विषय मे बताया था! उनके पास उपाय अवश्य होगा ।
राजा ने घोड़ा निकाला और उस महात्मा (साधु) की तलाश करने जंगल की ओर निकल पड़ा काफी ढूंढने के बाद उसे एक गुफा में वह महात्मा मां काली की पूजा करते हुए दिखाई दिए वहां पर हवन कुंड जल रहा था आसपास जंगली जीव बैठे थे ।
राजा -  महाराज मदद.... मदद.....करे हाथ जोड़ते हुए!
महात्मा जी - क्या हुआ राजन
राजा - वो फल सबकी जान ले रहा है मेरी रानी भी कुछ दिन में मर जाएगी
महात्मा जी  ने आँख बंद की और ध्यान लगाकर देखा तब उनको सब समझ में आ गया ।
राजा - महाराज कोई उपाय बताइए नही तो  रानी गायब हो जाएगी और पुनः कभी नहीं लौट पाएगी हमारे राज्य-महल के अनेक  दास दासिया इसी तरह गायब हो चुकी है और उनका कुछ पता नहीं है
महात्मा जी -  तुम्हारी रानी ने उस फल को खाने की बजाय उस कुएं में फेंक दिया जिस कारण कुएं में उस बच्चे की आत्मा आ गई और वह भूख के कारण रात में रोता है और सभी दास  दासिया उसका खाना बन गयी  हैं जैसे-जैसे वह अंगों को खाता वैसे-वैसे अंग गायब हो जाते है
राजा - जल्द चले मेरे साथ महाराज ।
दोनों लोग महल की ओर निकल पड़ते है
महात्मा जी ने महल पहुंचकर रानी को देखा तो उसका एक हाथ और दोनों पर गायब हो चुके थे
राजा- मेरी रानी को बचा लीजिए महाराज ।
महाराज जी- इसके लिए तुम्हें उस कुएं का पूरा पानी सुखाना होगा और अंत में जो फल  दिखाई दे उसको जला देना होगा क्योंकि जब वो फल जलेगा तभी ही उस आत्मा को मुक्ति मिलेगी और सभी दास दासियों को। नहीं तो यह सिलसिला कभी नहीं रुकेगा ।
और तब ही रानी सही हो पाएगी नही तो 2 दिन में वो भी गयाब हो जाएंगी।
राजा ने अपने सैनिकों को आज्ञा दी जो उस कुएं को मिट्टी से भर दो
जहां सैनिक उस कुएं में मिट्टी डालने की कोशिश करते हैं कुएं का पानी ऊपर आकर उन सैनिकों को निगल जाता ।
पानी का यह डरावना रूप देखकर राजा और महात्मा जी दोनों घबरा गए ।
राजा-  महात्मा जी कुछ करिए
महात्मा जी ने एक मुट्ठी में सिंदूर लिया और मंत्र पढ़कर कुए के चारों ओर एक गोला बना दिया  और बोला कि इस गोले के अंदर कोई नहीं जाएगा बाहर से ही मिट्टी कुँए में डालो और जब फल ऊपर पर आए उसे जला देना ।
अब कुए का पानी बाहर नहीं आ रहा था ना ही वह डरावने रूप में दिखाई दे रहा था तब सैनिकों ने उस कुएं में मिट्टी डालना शुरू किया जैसे-जैसे मिट्टी डाली जाती  कुँए से आवाजे आती अंत में फल सामने आया तब उस पर राजा ने कुएं में खूब सारी लकड़ियां डाली और महात्मा जी ने मंत्रों के द्वारा आग  दी आग लगने के बाद जितने भी दास दासिया गायब हुई थी उन सब की आत्माएं निकल गई और मुक्त हो गई साथ में उस बच्चे की भी इधर धीरे धीरे रानी सही हो गयी और राजा ने फिर उस कुएं को बंद करवा दिया हमेशा के लिए ।
फिर राजा और रानी ने महात्मा जी का धन्यवाद दिया ।



Wednesday, December 25, 2019

बोलता मुर्दा


यह एक बहुत पुरानी बात है रेवाड़ी गढ़ नामक गाँव में  बप्पन नाई रहता था वो बहुत गुस्सैल और घमंडी था ! उसके स्वभाव के कारण उसका कोई मित्र नही था । जिस कारण वो अकेला ही रहता था समय बिता और वह बुढ़ा हो गया पर उसके स्वभाव में कोई परिवर्तन नही आया जिस कारण सारे पड़ोसियों ने उससे दूरी बना ली गाँव मे कोई उससे बात नही करता था बुढ़ापे के कारण एक बार वो बीमार पड़ गया पर  कोई गाँव वाला उसकी मदद करने नही आया और बीमारी के चलते उसकी मृत्यु हो गयी. ....
बप्पन के बुरे कर्मो के कारण यमराज के दूत उसे नर्क में ले जाते है.  

पहला दूत-  इसने बहुत सारे बुरे काम किए हैं इसे बहुत बड़ी सजा मिलेगी ! !!!

  दूसरा दूत - चलो एक कढ़ाई तेल गर्म करवाया जाए फिर उसमें डाल कर इसको तल दिया जाए....

जिस तरह इसने लोगों को परेशान किया उसी तरह इसको पर भी परेशान किया जाएगा वहां पर इस तरह की चर्चाएं हो रही थी और बब्बन डर के मारे मारे कांप रहा था और बार-बार माफी की गुहार लगा रहा था ...

. तभी वहां दो अंगरक्षक आते हैं और बब्बन को एक बहुत  अंधेरे वाली जगह में ले जाते हैं जहां उसे एक कालकोठरी में डाल देते हैं वहां पर बहुत सारे सांप कीड़े मकोड़े और हड्डियां पड़ी रहती हैं जो इंसानों की होती हैं जिन्होंने बुरे कर्म किए होते हैं .....

.सांप और कीड़े मकोड़ों को देखकर बप्पा कांपने लगता है तथा वह हड्डी उठाकर उन्हें दूर भगाने की कोशिश करने लगता है यहां से निकलने की कोशिश और उपाय सोचने लगता है कि किस तरह वह नरक से भाग जाए और वह वापस जाकर धरती पर अपनी इच्छाएं पूरी करें !
अब अपन नर्क से भागने की योजना बनाने लगता है वह सोचता है कि किस तरह से निकला जाए वह वहां पर हड्डियों से एक चाकू बनाता है और जेल का दरवाजा खोलने की कोशिश करता है काफी देर कोशिश करने के बाद वह कामयाब हो जाता है और  जेल के दरवाजे को खोल देता है लेकिन नर्क से भागना इतना आसान नहीं होता !!! वह जब बाहर निकलता है तो उसके सामने तीन बहुत विशालकाय दरवाजे होते हैं ......

जिनमें अलग-अलग निशान बने होते हैं  पहले दरवाजे के पास जाता है  कुछ नहीं होता ..... तभी दूसरा दरवाजा उससे पूछता है कि तू किधर जाएगा बप्पन बोलने वाला दरवाजा देखकर चकित हो जाता है वो सो रहा है (पहला दरवाजा)

बप्पन - धरती जाने का रास्ता बताओ!!!!!!!

दूसरा दरवाजा- 

बताता है कि वह बड़ा ही खतरनाक गुप्त रास्ता है जो तीसरे दरवाजे से होकर जाता

है वहां पर उसे उड़ने वाले सांप मिलेंगे  सांपों की रानी के पास एक गुप्त दरवाजे की चाबी है वह चाबी लाकर तुम्हें वह दरवाजा खोलना होगा और खोलते ही तुम्हें पृथ्वी का रास्ता मिल जाएगा पर ध्यान रहे यदि किसी सांप ने तुम्हें देख लिया तो तुम तुरंत वापस आ जाओगे और यदि सांपों की मल्लिका ने तुम्हें देख लिया तो उसकी आंखों को देखते ही तुम एक पत्थर बन जाओगे तो ध्यान रहे यह काम तुम्हें अत्यंत सावधानी से करना होगा!!!!

  अब बप्पन बड़ी सावधानी से छिपकर तीसरे दरवाजे की ओर बढ़ता है और उसे खोलता है  वह देखता है एक अजीब सी डरावनी दुनिया है जहां पर जमीन का रंग नीला और आसमान का रंग हरा सभी पेड़ पौधे लाल और काले ...

बप्पन यह नज़ारा देखकर डर गया और आगे बढ़ने लगा कुछ ही दूर चलने पर उसका सामना एक आदमखोर पेड़ से हुआ जो सांपों को निकल रहा था वह उड़ने वाले सांपों को हवा में ही खा जाता !

बप्पन यह सब देखकर घबरा गया और सोचने लगा  किस तरह बचा जाए यह तो मुझे भी खा जाएगा अब उसने एक तरकीब लगाई और अपने शरीर को पत्तियों में लपेट ली और धीरे-धीरे करके व आगे निकल जाता है और वह उड़ने वाले सांपों से बचता बचाता छिपता हुआ आगे बढ़ने लगता है पर वह सांपों की मल्लिका से नहीं बच पाता वहां के पहरेदार उसको पकड़ लेते हैं और बब्बन को पकड़कर नागों की मल्लिका के सामने ले जाते हैं नागों की महारानी को देखकर बप्पन काँपने लगता है डर के वजह से उसकी घिग्घी बन जाती है महारानी बहुत ही डरावनी थी उसके बड़े बड़े नाखून भूरी आंखें पीले बाल और हजारों हाथ और  तीन सर थे और एक लंबी पूछ । 
दरवार में !

नाग मल्लिका-   यहां क्यों आए हो तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई यहाँ आने की अब आ गए हो तो मेरा खाना बनोगे।

बप्पन - मैं अपको देखने आया हु सुना था कि आप बड़ी दयावान है

नाग मल्लिका- दयावान मैं हा हा हा हा हा हा हा

बप्पन - महारानी आप चाहे तो मुझे खा ले पर यदि आप मुझे धरती पर वापस भेज देंगी तो मैं रोजाना आपको एक इंसान भोजन के लिए भेजता रहूंगा।

नाग मल्लिका-  मूर्ख तू नाग मल्लिका को लालच दे रहा है हा हा हा हा हा हा बहुत जल्द ही सबसे पहले तू मेरा खाना बनेगा ।

बप्पन- महारानी मैं जरूर भेजूंगा अगर मैं ना भेजूं तो आप मुझे खा लीजिएगा!!

नाग मल्लिका - मल्लिका  तीनों सर आपस में बात करने लगते हैं और बप्पन को अपना वादा याद दिलाते हुए कहते है

बप्पन यदि तूने अपना वादा नहीं पूरा किया तो मैं तुझे खा जाऊंगी पर इस बात का ध्यान रखना की आग के पास तेरी कोई भी शक्तियां काम नहीं करेंगे आग से दूर ही  रहना तथा पृथ्वी पर जाकर अपने शरीर को जलने से बचाव तभी तू मेरा काम कर पाएगा !!

बप्पन- जो हुमुम महारानी......

बप्पन की आत्मा तुरंत  धरती की तरफ बढ़ने लगती है

गांव में बप्पन की मौत की खबर फैल जाती है और गांव के कुछ सज्जन लोग कहते हैं कि इसको श्मशान तक ले चलो पर कोई तैयार नहीं होता मात्र तीन लोग तैयार होते हैं पर बहुत कहने पर एक और व्यक्ति चलने के लिए तैयार हो जाता है भूरा , लल्ला , भानू ,जग्गू चारों लोग बप्पन की अर्थी तैयार करके एक मशाल जलाकर गंगा की ओर निकल पड़ते हैं गांव से गंगा नदी काफी दूर होने के कारण चारों लोग चलते रहते हैं सुनसान सड़क में गांव की पगडंडियों के बीच झाड़ियों के बीच से गुजरते हुए आगे बढ़ते रहते हैं इसी बीच शाम हो जाती है और सूरज ढलने लगता है तभी अचानक मसाल भी बंद हो जाती है ।

भूरा- लल्ला भाई वह देखो पास के गांव में रोशनी दिख रही है जाओ वहां से मशाल जला लाओ!
लल्ला- भूरा मैं अकेले नहीं जाऊंगा गांव काफी दूर है यह  घना जंगल मेरे साथ किसी और को भी भेजो!

जग्गू- पास में ही तो है तुम रुको मैं साथ में चलता हूं

चारों लोग बप्पन की अर्थी को एक बेल के पेड़ के नीचे रख देते हैं
जग्गू और लल्ला दोनों गांव की ओर पास के गांव की ओर निकल पड़ते हैं और आपस में बात करते हैं कि जल्दी ही आग लेकर वापस आ जाएंगे इधर भूरा और भानु अकेले बब्बन के पास बैठ जाते हैं खेतों में सरसों खड़ी है जिस कारण आसपास का कुछ दिखाई नहीं देता!
तभी अजीब सी आवाज होती है जैसे कोई सियार रो रहा हो यह बिल्ली रो रही हो
भानु- यह कैसी आवाज है

दोनों चौक जाते हैं!!!!!!
भूरा - तुम रुको मैं देख करता हूं है क्या यह कौन सा जानवर है 
भूरा एक डंडी उठाता है और थोड़ी दूर जाकर देखने लगता है
कभी अचानक बप्पन के ऊपर एक चमकीला बादल  बादल मंडराने लगता है और हरी रोशनी उसके शरीर में घुस जाती है

बप्पन की लाश -क्यों रे  भानु तुम मुझे देख रहा है  घूर घूर कर भानु डर जाता है और उसकी घिग्घी बंद हो जाती है वह कुछ बोल नहीं पाता.... और भागने लगता है उसके पीछे बप्पन की अर्थी भी भागने लगती है और भानु को एक साँप  बनके खा जाती है और वापस आकर उसी पेड़ के नीचे आ जाती है ।

भूरा वापस आता है पर भानु कहीं दिखाई नहीं देता वह तीन चार बार आवाज देता है भानु .भ...... भानु.......  भानु.....

तभी अचानक बप्पन सामने  खड़ा हो जाता है  क्यों रे भूरा ...   (सफ़ेद कपड़े हरी आँखे काली जीभ साँप की तरह ) भूरा देखता ही रहता ....  है ...... अअअअअ अअअअअअ

और बप्पन उसे जादू से ग़ायब कर देता है ....
और पेड़ में चढ़कर बैठ जाता है ....

कुछ देर में जग्गू और लल्ला आग लेकर वापस आ जाते हैं देखते हैं कि वहां कोई नहीं है ना भूरा ना भानु ना ही बप्पन...
भूरा....भूरा..... भानु... भानु......

तभी जग्गू को भूरा  का कटा हुआ हाथ दिखाई देता है.........
जग्गू - लल्ला ....लल्ला....   ..... देखो... देखो..... भूरा......भू.... त
फिर दोनों जग्गू और लल्ला अपने गाँव की तरफ भागते है और दौड़ते रहते है ......जब तक पहुंच नहीं जाते .......

गाँव पहुंच कर वह सब बात बताते है .... की आग के कारण वो बच गए .....नही तो वो भी मारे जाते .....
कुछ दिनों बाद जग्गू गायब हो जाता है .....
और आज भी बप्पन लोगो को मार रहा है और उसी पेड़ पर रह रहा है .......
(तब से  अर्थी के साथ आग लें जाना सुरु किया गया और आज भी आग को जलाकर रखा जाता है और रात में चिता नहीं लगती .....)