Saturday, November 24, 2018

स्वप्न के आम


एक बहुत बड़ा जंगल होता था चारो तरफ हरयाली ही हरयाली , जहाँ सभी जानवर बहूत ख़ुशी ख़ुशी  रहते थे ,  और एक दूसरो की बुराइयां भी करते थे और हँसी माजक भी होता था और फिल्मो की बाते भी होती थी ,
वहाँ एक चूहा बड़ा फेमस था जब से उसने ग़जनी की तरह बाल कटावाये यही नहीं एक बंदरिया भी थी ,  जिसके दो बच्चे थे दोनों आवारा बिलकुल , सब जानवर उनसे अपने बच्चो को दूर रखते थे ,सब चल रहा था पूरा जंगल उनसे परेशांन था , कभी किसी को मारते कभी किसी को छेड़ते , जंगल में अपना गैंग बना कर ख़ूब मस्ती करते
शैतानियाँ करते और रात - रात घर भी नहीं आते घर में सब परेशान रहते , अब क्या करे माँ ?
उन दोनों की मित्रता एक हिरन से हो गयी अब क्या एक और हो गया शैतान , खूब उधम करते  बात नहीं मानते किसी की ,पढ़ाई लिखाई से कोई नाता ही नहीं था , एक दिन यह सब जंगल में बहूत अंदर तक चले गए ,वहां की हरयाली को देख कर सब उसमें उछलने लगे कूदने लगे , खेलते खेलते रात होने लगी थी , अब उन लोगो ने वपस चलने को सोचा  और चल पड़े कुछ दूर चलने के बाद वो जहाँ से चलते वही आ जाते ,  अब सब बड़ा परेशान सारी शैतानियाँ भूल गए अब पर करे क्या बड़ी बुरी तरह फंस गए थे ,  अब जंगल धीमे धीमे  काला होता जा रहा था , एक अजीब सी आवाज़ जंगल में फैलने लगी, अब उस सब के पसीने छूटने लगे और अब सारी हेकड़ी निकल गयी ,  दोनों भाई किसी तरह भाग निकले बस उस हिरन को  अकेला ही छोड़ दिया
रात किसी तरह उसने गुजारी अब बड़ी मुश्किल से घर पहुँचा , और सारी बात अपनी माँ को बताई ,अब वो भी क्या करे , उसने यह बात एक बुजुर्ग बंदर को  बतायी और पूँछा की उनको सबक कैसे सिखाये , बहूत शैतान है  उस बूढ़े बंदर ने कहा कि उनको मेरे पास भेजो ।
मै समझता हूँ , जब वो दोनों उसके पास आये तब उस बूढ़े बंदर ने  उनको एक  गुठली दी , और कहा कि यह गुठली एक ऐसे फल की है , जो बहूत मीठा , रसीला है , यह लो उसे ज़मीन को खोद कर उसमे डाल कर  मिट्टी से बंद कर दो ,फल के लालच में उन दोनों ने ऐसा ही किया , एक दिन एक छोटी सी कोपल फूटी  और उसे देख कर बच्चे बड़े खुश हुए , सोचा यह आम की गुठली होगी ,क्योंकि वही रसीला और मीठा फल है ,अब उनको जल्दी से आम चाहिए थे । क्या करे ! रोज देखते कुछ नही निकलता , बाबा के पास जाते बाबा आम कब होंगे ! होंगे इंतजार करो   और खुद को अच्छा बनाओ तब होंगे आम ,  अब उनमे सुधार आने लगा , रोज आम के पास जाते  उसको पानी देते , अब स्वप्न भी आम के आते ।  देखते देखते  पेड़ विशालकाय हो गया पर आम नहीं आये और वो दोनों भी बूढ़े हो गए अब पेड़ पर बहुत से बन्दर रहने लगे थे , क्योंकि कुछ पेड़ पुराने होकर गिर गए थे , तो सब अब उसी पेड़ में  रहने लगे थे  और पेड़ उन दोनों ने लगाया था तो सब  बन्दर उनका बहुत मान सम्मान करते थे , इनकी इज्जत सब करते थे,  सब उनका कहना मानते थे ,  पर वो दोनों आज भी आम का इंतजार कर रहे थे, और कभी कभी बहूत दुःखी हो जाते की उस बाबा ने हमको धोखा दिया है ,  कहा था की इस पेड़ में बड़ा रसीला फल होगा पर कुछ नहीं हुआ, समय बीता एक दिन एक बुद्धिमान बंदर उनको मिला तो उन्होंने सोचा यह ज्ञानी बता सकता ही की इसमें आम क्यों नहीं हो रहे है,   फिर एक दिन उन दोनों ने उस बुद्धिमान बन्दर से पूछा और पूरी कहानी बताई ,  उसने पेड़ देखा कहा इसमें आम नहीं आएंगे क्योंकि यह पेड़ आम का नहीं बरगद का है ,इसमें आम नहीं होंगे , दोनों उदास हो गए  और उस बाबा को कोसने लगे सभी बन्दर उनको उदास देख कर उदास हो गए ,  उस ज्ञानी बन्दर ने देखा और चला गया  और कहा कि समय आने पर बताऊँगा  समय बीता  दोनों बन्दरो में से एक बीमार हो गया , वो ज्ञानी बंदर भी उनको देखने आया , उसने देखा सारे पेड़ के बंदर उसकी सेवा कर रहे है, कोई फल ला रहा है कोई  पानी , कोई कुछ कोई कुछ ला रहा है ,पूरा कुम्बा उसकी सेवा कर रहा था , ज्ञानी बन्दर उस बन्दर के पास गया और कहा कि यह है ! वो मीठा और रसीला फल , जो तुम्हारी सेवा हो रही है यही वो फल है !

(कहते है आप अगर नेक काम करते है , जाने या अनजाने , उसका फल एक दिन जरूर मिलता है)

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