स्वानत्मकथा ( DOG BIOGRAPHY)
मेरा जन्म कब हुआ यह नहीं पता मुझे न समय न दिन पर यह पता है कि मेरे दो भाई एक बहन है और चौथा मैं सबसे छोटा मैं सड़क के किनारे एक बड़े पानी के पाइप में रहता हूं शायद यहां ही मेरा जन्म हुआ मेरी मां पता नहीं कहां चली जाती है जब लौटकर आती है तभी मेरी भूख-प्यास समाप्त होती कभी-कभी सोचता हूं और दूसरों को देखता हूं तो जलन सी होती है क्योंकि मैं काला हूं और मेरे सभी भाई बहन सफेद मैं बाहर नहीं जाता माँ कहती है कि मैं बहुत छोटा हूं इसलिए पाइप से बाहर मत जाया करो बाहर बहुत खतरनाक लोग रहते हैं पर मुझे यह दुनिया देखने में अच्छी लगती है जब मेरे भाई बहन जा सकते हैं तो मैं क्यों नहीं यही सोचता रहता और खेलता रहता हूं कभी-कभी हिम्मत भी करता हूं उस पाइप से बाहर जाने की पर इंसानों की वजह से बहुत डर लगता है खाने में मुझे सब पसंद है बस अपने परिवार से दूर जाना नहीं एक दिन मैं बैठा हुआ मां का इंतजार कर रहा था मां आई तो पता चला मेरे एक भाई को एक इंसान की गाड़ी ने कुचल दिया और वह मर गया कितनी सस्ती जिंदगी होती है हमारी यह मैं मां से अक्सर पूछता और वह कुछ जवाब नहीं देती और मुस्कुरा कर चली जाती है मैं भी धीरे-धीरे बड़ा हो रहा हूं दुनिया की समझ आ रही है सबसे खुशी की बात तो यह है कि अब मेरी पूछ भी बड़ी हो गई है और मैं जिस तरह से चाहता हूं उसको हिला लेता हूं सबकी खुशबू तो मेरे नाक में बस गई है अब मां ने भी कह दिया कि तुम बाहर जा सकते हो क्या मैं बड़ा हो गया हूं पता है आज खुशी का दिन है आज मैं बाहर इस दुनिया को देखूंगा मां कहती है इस दुनिया का सबसे बड़ा खतरनाक जानवर इंसान है उससे बचकर रहना अब मुझको इंसान को भी देखना है कैसा लगता है क्या उसके भी पूछ होगी या नहीं क्या उसके भी मेरी मां की तरह बड़े बड़े दाँत होंगे पता नहीं पर कल सुबह देख लूंगा कि इंसान भी कैसे लगते हैं अब रात भर मुझे नींद नहीं आ रही सुबह का इंतजार है यह चांद भी धीमे धीमे नीचे जाने की बजाए चढ़ता हुआ नजर आ रहा और यह सोचते सोचते ना जाने कब मेरी नींद लग गई और सुबह हो गई सुबह होते ही खुशी के कारण है मेरी पुंछ हिलना शुरू हो गई और वह बंद नहीं हो रही है बाहर जाऊंगा देखूंगा सबको फिर मैं इस पाइप में कभी नहीं आऊंगा पक्का है मैंने जब बाहर एक कदम बढ़ाया तो मुझे बहुत अच्छा लगा मेरे चारों पैरों के नीचे गुदगुदी सी हरी हरी घास मन करा कि लेट जाऊं और मैंने दो-तीन गुलाटियां मार ही ली पर मुझे आज ही सब कुछ देखना है इसलिए आज कुछ नहीं करुंगा केवल इंसानों से मिलूंगा देखूं क्या वह मुझसे भी खतरनाक है तभी मुझे एक बड़ा सा इंसान आता हुआ दिखा मां ने कहा चलो अंदर जल्दी से मैं चुपके से पेड़ के किनारे से उसे देखता रहा और सोचा यह कितना अजीब है ना इसकी अच्छी सी नाक है दांत भी इतने छोटे छोटे से हैं कान भी छोटे से हैं और सबसे बड़ी बात पूछ तो है ही नहीं बिना पूछ कोई जिंदगी होती है कैसे रहते यह लोग रहते हैं जब गर्मी लगती होगी तब क्या करते होगे जब खुश होते होंगे तब क्या करते होंगे अच्छा हुआ हम कुत्ते हैं कम से कम पूंछ तो है अब मैं पार्क में घूमने लगा घूमते-घूमते मुझे मेरे जैसा एक काले सफेद रंग का कोई दिखा मैं उसके पास जाना चाहता था पर कोई इंसान उसे लेकर चला गया । कहां गया इंसान को काट खाता और मेरे पास आ जाता मां ने आज कहा कि मैं आज खाने की तलाश में उनके साथ चलु मैं और भी खुश हूं मां खाना बनाती कहां पर है यह मुझे देखना है मैं मां के पीछे धीमे धीमे चलने लगा इंसानों के बीच से निकलता हुआ किनारे किनारे चलता रहा मां ने बताया किस काली सी दिखने वाली लाइन मैं मत जाना इसको सड़क कहते हैं इसमें बड़ी खतरनाक गाड़ियां निकलती है इस सड़क नहीं तुम्हारे भाई को मारा है अब मुझे इससे बड़ा डर लगने लगा मां से पूछा मैं इस को बनाया किसने इंसान ने क्या हमें मारने के लिए । नहीं या नहीं पता पर हो भी सकता है मैं आगे चलता रहा तभी एक बड़ा सा काला दब्बा दिखाई दिया मां ने मुझे बुलाया और उसमें अंदर आने के लिए कहा मैं भी उछल कर अंदर चला गया मैंने देखा वहां ढेर सारा खाना था मैं खाना खाने लगा साथ में मेरे सभी भाई बहन मेरा पेट भर गया हमें वापस आया और मैंने देखा कि एक इंसान मेरे जैसे एक कुत्ते को लिए अपने साथ ले जा रहा है और उसे खूब प्यार कर रहा है मैंने मां से पूछा मां यह इंसान हमको क्यों नहीं प्यार करते मां ने जवाब दिया पता नहीं और लौटकर हम लोग पाइप में आ गए मैं रातभर इंसानों के बारे में सोचता रहा कि इंसान अच्छे भी होते हैं अगर अच्छे होते तो मेरे भाई को क्यों मारते अब मेरी तलाश इंसानों के ऊपर थी और मैं यह जान कर रहूंगा कि इंसान होते कैसे हैं सुबह सुबह मेरी नींद अचानक टूट गई मेरी मां किसी पर चिल्ला रही थी मैं बाहर निकला तब मैंने देखा एक अजीब सा जानवर पेड़ पर बैठा था और मेरी मां उसको जाने को कह रही थी और चिल्ला रही थी मैं दौड़कर मां के पास गया और उसको चिल्लाने लगा उस पर भौंकने लगा मेरी मां ने मुझे छुप जाने के लिए कहा पर मैं नहीं माना मैंने पूछा यह है कौन मां ने कहा यह इंसानों के पूर्वज मतलब मतलब कि इंसान उन से बने हैं यह बंदर है इसका मतलब इंसान किसी को नहीं होते जब उन्होंने अपने इस ताऊ जी को बाहर निकाल कर पेड़ पर बैठा दिया तो फिर वह हमें कैसे प्यार करेंगे मैंने उसको बड़े गौर से देखा उसका चेहरा कुछ कुछ इंसानों से मिल रहा था फिर उसकी एक बड़ी सी पूछ थी वह भी काला था मैं सोचने लगा शायद इंसानों की पूछ जब निकल आती है तब वह आपस में लड़कर सबको भगा देते हैं और फिर वह ऐसे ही पेड़ में रहने लगते हैं मैं भी अब अपनी जिंदगी से खुश होकर घूमने लगा कि मेरे पास सब कुछ है किसी चीज की कमी नहीं अब किस चीज की तलाश नहीं है पर मुझे इंसानों के बारे में और जानना है इसलिए मैं इस खोज पर निकल पड़ा अकेला कुछ दिनों में मैं अपने जैसे कई लोगों से मिला पर वह सब झगड़ालू थे मैं घर से बहुत दूर आ गया था और मैं अकेला चलता जा रहा था फिर एक पेड़ के किनारे बैठ कर पेड़ के सामने एक बहुत बड़ी इमारत थी उस इमारत पर मेरे जैसे ना जाने कितने पूछ वाले जानवर थे मेरा मन सब से मिलने को करता पर सभी बहुत घमंडी थे कोई मुझसे बात नहीं करता वह लोग शायद इंसानों के साथ रहकर ऐसे हो गए लेकिन एक इंसान ने मुझे रोटी देना शुरू कर दिया मुझे वह भी बहुत अच्छा लगता था वह भी उस बिल्डिंग के बाहर एक छोटी सी कुटिया में रहता मैं भी उसके साथ रहने लगा और इंसानों के बारे में मेरी राय अब बदलने लगी थी कि इंसान गलत होते हैं खतरनाक होते हैं हम दोनों खूब बातें करते खूब मस्ती करते हैं और सुबह शाम घूमने जाते खाने की तो कमी नहीं थी जो मन हो वह खाओ जहां मन हो वहां जाओ वह भी शायद बुड्ढे थे इसलिए ज्यादा खेलते नहीं थे शायद उनके भी पूछ निकलने वाली थी इसीलिए इंसानों ने उन्हें अपने से दूर कर दिया था एक दिन मैंने देखा की एक इंसान एक सफेद पूछ वाली प्यारी सी लड़की को लेकर एक पेड़ के पास बांध कर चला गया वह लड़की उसका इंतजार करती रही पर वह नहीं आया सुबह से शाम हो गई क्या इंसान ऐसे भी होते हैं मैंने उसके पास जाने की कोशिश की तो उसने मुझ पर चिल्लाना शुरु कर दिया मैं भाग कर अपने मालिक के पास आ गया और उससे उस सफेद पूछ वाली के बारे में बताने की कोशिश करने लगा मेरा मालिक मेरे साथ चलकर उसके पास गए तो मैंने देखा उसके शरीर पर अनेक घाव थे और वह उसको साफ कर रही थी हम लोग उसको अपने साथ ले आए और उसके घाव का इलाज किया उसकी पूंछ झड़ गई थी वह बोलती नहीं थी पता नहीं क्यों शायद उसको इंसानो के द्वारा सदमा लगा होगा पर उसको नहीं पता कि कुछ इंसान अच्छे भी होते हैं लेकिन पता नहीं कौन वाले शायद जिनकी पूंछ निकलने वाली होती होगी वह अच्छे हो जाते होंगे पता नहीं धीरे-धीरे वह भी हम से बोलने लगी हम सब साथ में खेलने और खाने लगे एक दिन मेरे मालिक को पता नहीं क्या हो गया वह कुछ बोल नहीं रहे थे शायद उनकी पूछ निकलने वाली थी इसलिए कुछ इंसान आए और उनको लेकर चले गए आपस में बोल रहे थे कि उनकी मृत्यु हो गई मैं सोचने लगा अभी तो पूछ निकालनी बाकी है तो मर कैसे सकते हैं तब हम दोनों उदास होकर बैठ गए 2 दिन तक बैठे रहे फिर वहां के चौकीदार ने हमको भगा दिया मेरे पैर में तो चोट भी आई अब हम वापस अपने घर के लिए निकल पड़े घर पहुंचकर देखा कि मेरी मां और मेरी एक बहन बची है मैंने अपनी मां से अपने भाई के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा क्यों उसको इंसानों ने जेल में डाल दिया है शायद वह कभी वापस नहीं आएगा अब मैं इंसानों के बारे में सोचने लगा कि कितने अजीब होते हैं जब वह आपस में ही सही नहीं रहते तो हमारे लिए क्या करेंगे इंसान मतलबी होते हैं इसलिए हम अपने सारे परिवार के साथ जंगल की तरफ निकल गए वहां कई पूछ वाले इंसानों के ताऊ चाचा बाबा थे शायद वह मरने से बच गए होंगे

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