यह एक बहुत पुरानी बात है रेवाड़ी गढ़ नामक गाँव में बप्पन नाई रहता था वो बहुत गुस्सैल और घमंडी था ! उसके स्वभाव के कारण उसका कोई मित्र नही था । जिस कारण वो अकेला ही रहता था समय बिता और वह बुढ़ा हो गया पर उसके स्वभाव में कोई परिवर्तन नही आया जिस कारण सारे पड़ोसियों ने उससे दूरी बना ली गाँव मे कोई उससे बात नही करता था बुढ़ापे के कारण एक बार वो बीमार पड़ गया पर कोई गाँव वाला उसकी मदद करने नही आया और बीमारी के चलते उसकी मृत्यु हो गयी. ....
बप्पन के बुरे कर्मो के कारण यमराज के दूत उसे नर्क में ले जाते है.
पहला दूत- इसने बहुत सारे बुरे काम किए हैं इसे बहुत बड़ी सजा मिलेगी ! !!!
दूसरा दूत - चलो एक कढ़ाई तेल गर्म करवाया जाए फिर उसमें डाल कर इसको तल दिया जाए....
जिस तरह इसने लोगों को परेशान किया उसी तरह इसको पर भी परेशान किया जाएगा वहां पर इस तरह की चर्चाएं हो रही थी और बब्बन डर के मारे मारे कांप रहा था और बार-बार माफी की गुहार लगा रहा था ...
. तभी वहां दो अंगरक्षक आते हैं और बब्बन को एक बहुत अंधेरे वाली जगह में ले जाते हैं जहां उसे एक कालकोठरी में डाल देते हैं वहां पर बहुत सारे सांप कीड़े मकोड़े और हड्डियां पड़ी रहती हैं जो इंसानों की होती हैं जिन्होंने बुरे कर्म किए होते हैं .....
.सांप और कीड़े मकोड़ों को देखकर बप्पा कांपने लगता है तथा वह हड्डी उठाकर उन्हें दूर भगाने की कोशिश करने लगता है यहां से निकलने की कोशिश और उपाय सोचने लगता है कि किस तरह वह नरक से भाग जाए और वह वापस जाकर धरती पर अपनी इच्छाएं पूरी करें !
अब अपन नर्क से भागने की योजना बनाने लगता है वह सोचता है कि किस तरह से निकला जाए वह वहां पर हड्डियों से एक चाकू बनाता है और जेल का दरवाजा खोलने की कोशिश करता है काफी देर कोशिश करने के बाद वह कामयाब हो जाता है और जेल के दरवाजे को खोल देता है लेकिन नर्क से भागना इतना आसान नहीं होता !!! वह जब बाहर निकलता है तो उसके सामने तीन बहुत विशालकाय दरवाजे होते हैं ......
जिनमें अलग-अलग निशान बने होते हैं पहले दरवाजे के पास जाता है कुछ नहीं होता ..... तभी दूसरा दरवाजा उससे पूछता है कि तू किधर जाएगा बप्पन बोलने वाला दरवाजा देखकर चकित हो जाता है वो सो रहा है (पहला दरवाजा)
बप्पन - धरती जाने का रास्ता बताओ!!!!!!!
दूसरा दरवाजा-
बताता है कि वह बड़ा ही खतरनाक गुप्त रास्ता है जो तीसरे दरवाजे से होकर जाता
है वहां पर उसे उड़ने वाले सांप मिलेंगे सांपों की रानी के पास एक गुप्त दरवाजे की चाबी है वह चाबी लाकर तुम्हें वह दरवाजा खोलना होगा और खोलते ही तुम्हें पृथ्वी का रास्ता मिल जाएगा पर ध्यान रहे यदि किसी सांप ने तुम्हें देख लिया तो तुम तुरंत वापस आ जाओगे और यदि सांपों की मल्लिका ने तुम्हें देख लिया तो उसकी आंखों को देखते ही तुम एक पत्थर बन जाओगे तो ध्यान रहे यह काम तुम्हें अत्यंत सावधानी से करना होगा!!!!अब बप्पन बड़ी सावधानी से छिपकर तीसरे दरवाजे की ओर बढ़ता है और उसे खोलता है वह देखता है एक अजीब सी डरावनी दुनिया है जहां पर जमीन का रंग नीला और आसमान का रंग हरा सभी पेड़ पौधे लाल और काले ...
बप्पन यह नज़ारा देखकर डर गया और आगे बढ़ने लगा कुछ ही दूर चलने पर उसका सामना एक आदमखोर पेड़ से हुआ जो सांपों को निकल रहा था वह उड़ने वाले सांपों को हवा में ही खा जाता !
बप्पन यह सब देखकर घबरा गया और सोचने लगा किस तरह बचा जाए यह तो मुझे भी खा जाएगा अब उसने एक तरकीब लगाई और अपने शरीर को पत्तियों में लपेट ली और धीरे-धीरे करके व आगे निकल जाता है और वह उड़ने वाले सांपों से बचता बचाता छिपता हुआ आगे बढ़ने लगता है पर वह सांपों की मल्लिका से नहीं बच पाता वहां के पहरेदार उसको पकड़ लेते हैं और बब्बन को पकड़कर नागों की मल्लिका के सामने ले जाते हैं नागों की महारानी को देखकर बप्पन काँपने लगता है डर के वजह से उसकी घिग्घी बन जाती है महारानी बहुत ही डरावनी थी उसके बड़े बड़े नाखून भूरी आंखें पीले बाल और हजारों हाथ और तीन सर थे और एक लंबी पूछ ।
दरवार में !
नाग मल्लिका- यहां क्यों आए हो तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई यहाँ आने की अब आ गए हो तो मेरा खाना बनोगे।
बप्पन - मैं अपको देखने आया हु सुना था कि आप बड़ी दयावान है
नाग मल्लिका- दयावान मैं हा हा हा हा हा हा हा
बप्पन - महारानी आप चाहे तो मुझे खा ले पर यदि आप मुझे धरती पर वापस भेज देंगी तो मैं रोजाना आपको एक इंसान भोजन के लिए भेजता रहूंगा।
नाग मल्लिका- मूर्ख तू नाग मल्लिका को लालच दे रहा है हा हा हा हा हा हा बहुत जल्द ही सबसे पहले तू मेरा खाना बनेगा ।
बप्पन- महारानी मैं जरूर भेजूंगा अगर मैं ना भेजूं तो आप मुझे खा लीजिएगा!!
नाग मल्लिका - मल्लिका तीनों सर आपस में बात करने लगते हैं और बप्पन को अपना वादा याद दिलाते हुए कहते है
बप्पन यदि तूने अपना वादा नहीं पूरा किया तो मैं तुझे खा जाऊंगी पर इस बात का ध्यान रखना की आग के पास तेरी कोई भी शक्तियां काम नहीं करेंगे आग से दूर ही रहना तथा पृथ्वी पर जाकर अपने शरीर को जलने से बचाव तभी तू मेरा काम कर पाएगा !!
बप्पन- जो हुमुम महारानी......
बप्पन की आत्मा तुरंत धरती की तरफ बढ़ने लगती है
गांव में बप्पन की मौत की खबर फैल जाती है और गांव के कुछ सज्जन लोग कहते हैं कि इसको श्मशान तक ले चलो पर कोई तैयार नहीं होता मात्र तीन लोग तैयार होते हैं पर बहुत कहने पर एक और व्यक्ति चलने के लिए तैयार हो जाता है भूरा , लल्ला , भानू ,जग्गू चारों लोग बप्पन की अर्थी तैयार करके एक मशाल जलाकर गंगा की ओर निकल पड़ते हैं गांव से गंगा नदी काफी दूर होने के कारण चारों लोग चलते रहते हैं सुनसान सड़क में गांव की पगडंडियों के बीच झाड़ियों के बीच से गुजरते हुए आगे बढ़ते रहते हैं इसी बीच शाम हो जाती है और सूरज ढलने लगता है तभी अचानक मसाल भी बंद हो जाती है ।
भूरा- लल्ला भाई वह देखो पास के गांव में रोशनी दिख रही है जाओ वहां से मशाल जला लाओ!
लल्ला- भूरा मैं अकेले नहीं जाऊंगा गांव काफी दूर है यह घना जंगल मेरे साथ किसी और को भी भेजो!
जग्गू- पास में ही तो है तुम रुको मैं साथ में चलता हूं
चारों लोग बप्पन की अर्थी को एक बेल के पेड़ के नीचे रख देते हैं
जग्गू और लल्ला दोनों गांव की ओर पास के गांव की ओर निकल पड़ते हैं और आपस में बात करते हैं कि जल्दी ही आग लेकर वापस आ जाएंगे इधर भूरा और भानु अकेले बब्बन के पास बैठ जाते हैं खेतों में सरसों खड़ी है जिस कारण आसपास का कुछ दिखाई नहीं देता!
तभी अजीब सी आवाज होती है जैसे कोई सियार रो रहा हो यह बिल्ली रो रही हो
भानु- यह कैसी आवाज है
दोनों चौक जाते हैं!!!!!!
भूरा - तुम रुको मैं देख करता हूं है क्या यह कौन सा जानवर है
भूरा एक डंडी उठाता है और थोड़ी दूर जाकर देखने लगता है
कभी अचानक बप्पन के ऊपर एक चमकीला बादल बादल मंडराने लगता है और हरी रोशनी उसके शरीर में घुस जाती है
बप्पन की लाश -क्यों रे भानु तुम मुझे देख रहा है घूर घूर कर भानु डर जाता है और उसकी घिग्घी बंद हो जाती है वह कुछ बोल नहीं पाता.... और भागने लगता है उसके पीछे बप्पन की अर्थी भी भागने लगती है और भानु को एक साँप बनके खा जाती है और वापस आकर उसी पेड़ के नीचे आ जाती है ।
भूरा वापस आता है पर भानु कहीं दिखाई नहीं देता वह तीन चार बार आवाज देता है भानु .भ...... भानु....... भानु.....
तभी अचानक बप्पन सामने खड़ा हो जाता है क्यों रे भूरा ... (सफ़ेद कपड़े हरी आँखे काली जीभ साँप की तरह ) भूरा देखता ही रहता .... है ...... अअअअअ अअअअअअ
और बप्पन उसे जादू से ग़ायब कर देता है ....
और पेड़ में चढ़कर बैठ जाता है ....
कुछ देर में जग्गू और लल्ला आग लेकर वापस आ जाते हैं देखते हैं कि वहां कोई नहीं है ना भूरा ना भानु ना ही बप्पन...
भूरा....भूरा..... भानु... भानु......
तभी जग्गू को भूरा का कटा हुआ हाथ दिखाई देता है.........
जग्गू - लल्ला ....लल्ला.... ..... देखो... देखो..... भूरा......भू.... त
फिर दोनों जग्गू और लल्ला अपने गाँव की तरफ भागते है और दौड़ते रहते है ......जब तक पहुंच नहीं जाते .......
गाँव पहुंच कर वह सब बात बताते है .... की आग के कारण वो बच गए .....नही तो वो भी मारे जाते .....
कुछ दिनों बाद जग्गू गायब हो जाता है .....
और आज भी बप्पन लोगो को मार रहा है और उसी पेड़ पर रह रहा है .......
(तब से अर्थी के साथ आग लें जाना सुरु किया गया और आज भी आग को जलाकर रखा जाता है और रात में चिता नहीं लगती .....)
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