Sunday, December 29, 2019

भूतिया कुआँ और जादुई फ़ल

भूतिया कुआँ और जादुई फ़ल ( भाग १)
गोपाल नगर  नाम का एक नगर था । वहाँ के सभी लोग बहुत अच्छे और सच्चे थे ,
गोपाल नगर के राजा वीर सिंह अपनी प्रजा को बहुत प्रेम करते थे और उनकी रानी उमा भी प्रजा के बीच अपने उदार और दानी स्वाभव के कारण राज्य के सभी लोग उनको अपनी पलको पर रखते थे, पर उनके कोई संतान नही जिसके कारण राजा रानी दोनों दुःखी रहते थे एक दिन उस नगर में एक महात्मा आये ।
महात्मा जी - (सैनिको से) यह राज्य तो बड़ा सुंदर है
सैनिक-  जी महाराज यहाँ एक राजा और रानी भी बहुत अच्छे है ।
महात्मा जी - मुझे राजा के पास ले चलो ।
सैनिक - जी महाराज !!!!!
महल के अंदर जाकर
राजा - स्वगत है आपका महात्मा जी हमारे राज्य में !
महात्मा जी - मैं तुम्हारा अतिथियों के प्रति प्रेम देखकर बड़ा खुश हुआ हूं ।
कोई वर माँगो मैं आज तुमको दूँगा!
राजा  - थोड़ा सोचने के बाद
राजा के सैनिकों को जाने के लिए कहा !!  सब सैनिक चले जाते है
राजा - महात्मा जी मैं बहुत ही दुःखी हू मेरी कोई भी संतान नही है
महात्मा- राजन दुःखी न हो मैं तुमको एक उपाय बताता हूँ । जिससे आपको संतान सुख आवश्य मिलेगा ।
राजा ( हाथ जोड़कर )- जी महाराज । आपकी महान दया होगी।।।।
महात्मा - राजन इस राज्य के बाहर जो जंगल है उसमें एक पेड़ है जो सफेद रंग का है अमावस्या की रात को उस पेड़ के फल को ले कर आओ वो फल चमकीला होगा जैसे अंधेरी रात में चाँद चमक रहा हो  और वो फल अपनी रानी को खिलाओ तुमको संतान अवश्य होगी ।
राजा - यह कैसा पेड़ है महाराज।।।
महात्मा-  जब किसी राज्य में किसी बालक की मृत्यु हो जाती है तब उसकी आत्मा  एक रात के लिये फल बन जाती है उस पेड़ में ! और उस पेड़ के फल के द्वारा भूत- चुलैड को संतान की प्राप्त होती है।
राजा - जी माहराज !
महात्मा - पर ध्यान रहे चुड़ैलो की भी नज़र उस फल में रहती है उनसे पहले वो तुमको लाना होगा ।
महात्मा जी - अब आज्ञा दे राजन यह कह कर चले जाते है! !!
फिर वो अमवस्या की रात आती है
रात में राजा घोड़े पर सवार होकर जंगल की ओर निकल पड़ता है आगे चल कर राजा देखता है कि जंगल के बीच में एक विशालकाय वृक्ष है जिसका फल अत्यंत ही चमकीला है जैसे किसी ने चांद को तोड़ कर वहां लगा दिया हो ।
जब राजा वृक्ष  के करीब पहुचता है तब उसे  दिखाई देता है कि बहुत सी चुलैड  भूत प्रेत उस फ़ल के इंतजार में नीचे बैठे हैं की वह फल गिरे और वह उसे खा कर खुद की संतान प्राप्त कर लें अब राजा झाड़ियों के बीच छुप जाता है ।
राजा फल पाने का उपाय सोचने लगता है - किस तरह इस फल को तोड़ लू!
तभी राजा को एक तरकीब सूझती है वह अपना धनुष बाण निकाल कर तीर को इस तरह चलाता है किस फल उस में फंस कर दूर कहीं चल गिर जाता है ।
अचानक फल के गायब होने से वहां बैठे भूत प्रेत और चुड़ैल अचंभे में आ जाती हैं और तुरंत गायब हो जाती है।
उन सब के चले जाने के बाद राजा फ़ल को ढूंढने लगता है और तब उसे झाड़ियों के बीच वह चमकदार फल मिल जाता है और वह तेजी से फल लेकर अपने राज्य की ओर निकल पड़ता है
राज्य पहुंचकर राजा फल अपनी रानी को देते हैं और कहते हैं
राजा- यह फल खा लो जिससे हम लोगों को संतान का सुख प्राप्त हो जाएगा।
रानी - यह कैसा फल है ? इतना चमकदार
राजा - इसे खा लो !!
रानी फल लेकर उसे खाने के बजाय उसे बाद में खाने को कहकर रख लेती है।
और बाद में जब रानी उस उस पल को देखती है और जब वह फल उसे अजीब सा लगता है
रानी पल को देख रही होती है तभी उसे उस पल में एक बच्चे की शक्ल दिखाई देती है रानी घबरा जाती है और उस फल को महल के कुएं में फेंक देती है
राजा - फल खा लिया
रानी - हा महाराज
फल को कुएं में फेंकने के कारण कुँए में बच्चे की आत्मा आ जाती है और रात में बच्चे के रोने की आवाज़ आती है  और पूरे महल में गूंजने लगती थी जिससे महल के सभी लोग घबरा जाते थे !
बात में क्योंकि उस कुएं के पानी का इस्तेमाल महल में होता था उस पानी को जो भी पीता उसका शरीर अजीब सा दिखने लगता शरीर मे काँटे निकल आते  और धीरे-धीरे वह अंग गायब हो जाता और अंत मे पूरा शरीर , इस तरह महल के सभी लोग गायब होने लगे ।
जब राजा को इस बात का पता चला तो आप बहुत घबरा गया उसने उस कुए को बंद करने का आदेश दे दिया । पर तब तक उस कुँए का पानी रानी पी चुकी थी जिस कारण उसका भी  शरीर धीरे धीरे गायब होने लगा यह देखकर राजा बहुत घबरा गया।
राजा -सोचने क्या करूँ । रानी को क्या हो गया ।
तब उसको उन साधु का ध्यान आया जिसने फल के विषय मे बताया था! उनके पास उपाय अवश्य होगा ।
राजा ने घोड़ा निकाला और उस महात्मा (साधु) की तलाश करने जंगल की ओर निकल पड़ा काफी ढूंढने के बाद उसे एक गुफा में वह महात्मा मां काली की पूजा करते हुए दिखाई दिए वहां पर हवन कुंड जल रहा था आसपास जंगली जीव बैठे थे ।
राजा -  महाराज मदद.... मदद.....करे हाथ जोड़ते हुए!
महात्मा जी - क्या हुआ राजन
राजा - वो फल सबकी जान ले रहा है मेरी रानी भी कुछ दिन में मर जाएगी
महात्मा जी  ने आँख बंद की और ध्यान लगाकर देखा तब उनको सब समझ में आ गया ।
राजा - महाराज कोई उपाय बताइए नही तो  रानी गायब हो जाएगी और पुनः कभी नहीं लौट पाएगी हमारे राज्य-महल के अनेक  दास दासिया इसी तरह गायब हो चुकी है और उनका कुछ पता नहीं है
महात्मा जी -  तुम्हारी रानी ने उस फल को खाने की बजाय उस कुएं में फेंक दिया जिस कारण कुएं में उस बच्चे की आत्मा आ गई और वह भूख के कारण रात में रोता है और सभी दास  दासिया उसका खाना बन गयी  हैं जैसे-जैसे वह अंगों को खाता वैसे-वैसे अंग गायब हो जाते है
राजा - जल्द चले मेरे साथ महाराज ।
दोनों लोग महल की ओर निकल पड़ते है
महात्मा जी ने महल पहुंचकर रानी को देखा तो उसका एक हाथ और दोनों पर गायब हो चुके थे
राजा- मेरी रानी को बचा लीजिए महाराज ।
महाराज जी- इसके लिए तुम्हें उस कुएं का पूरा पानी सुखाना होगा और अंत में जो फल  दिखाई दे उसको जला देना होगा क्योंकि जब वो फल जलेगा तभी ही उस आत्मा को मुक्ति मिलेगी और सभी दास दासियों को। नहीं तो यह सिलसिला कभी नहीं रुकेगा ।
और तब ही रानी सही हो पाएगी नही तो 2 दिन में वो भी गयाब हो जाएंगी।
राजा ने अपने सैनिकों को आज्ञा दी जो उस कुएं को मिट्टी से भर दो
जहां सैनिक उस कुएं में मिट्टी डालने की कोशिश करते हैं कुएं का पानी ऊपर आकर उन सैनिकों को निगल जाता ।
पानी का यह डरावना रूप देखकर राजा और महात्मा जी दोनों घबरा गए ।
राजा-  महात्मा जी कुछ करिए
महात्मा जी ने एक मुट्ठी में सिंदूर लिया और मंत्र पढ़कर कुए के चारों ओर एक गोला बना दिया  और बोला कि इस गोले के अंदर कोई नहीं जाएगा बाहर से ही मिट्टी कुँए में डालो और जब फल ऊपर पर आए उसे जला देना ।
अब कुए का पानी बाहर नहीं आ रहा था ना ही वह डरावने रूप में दिखाई दे रहा था तब सैनिकों ने उस कुएं में मिट्टी डालना शुरू किया जैसे-जैसे मिट्टी डाली जाती  कुँए से आवाजे आती अंत में फल सामने आया तब उस पर राजा ने कुएं में खूब सारी लकड़ियां डाली और महात्मा जी ने मंत्रों के द्वारा आग  दी आग लगने के बाद जितने भी दास दासिया गायब हुई थी उन सब की आत्माएं निकल गई और मुक्त हो गई साथ में उस बच्चे की भी इधर धीरे धीरे रानी सही हो गयी और राजा ने फिर उस कुएं को बंद करवा दिया हमेशा के लिए ।
फिर राजा और रानी ने महात्मा जी का धन्यवाद दिया ।



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