शायद ही पूरे विश्व में कोई ऐसा घर हो जहां लड़ाईयां ना होती हो पर आज की इस कहानी में हम आपको बताएंगे की लड़ाइयों से भी कैसे परिवार को एक किया जा सकता है इस पर पर आधारित आज की हमारी एक हास्य व्यंग से भरी हुई कहानी है घर की लड़ाईयां आइए आनंद लेते हैं
बहुत समय पहले की बात है भारतवर्ष के प्रयाग नगरी इलाहाबाद में एक परिवार रहता था सब कुछ अच्छा था परिवार में 8 सदस्य सब प्रेम से रहते थे खाते थे पीते थे हंसते थे और अपना जीवन सुखमय व्यतीत कर रहे थे पर होता यह है कि वक्त हमेशा एक सा नहीं रहता उसमें भी परिवर्तन आना लाजमी है समय बीता अब सदस्यों में तीन भाई थे दो भाइयों की पत्नियां थी एक भाई कुँवारा था और बड़े भाई के एक लड़की एक लड़का और बीच वाले भाई के एक लड़का था सब कुशल मंगल से घर में रहते थे एक दिन सबसे छोटा वाला भाई किसी कारण से नाराज हो गया अब क्या था । वह नाराजगी दिन प्रतिदिन बढ़ती रही और लड़ाईयां होती रही जब लड़ाईयां हद पार कर गई तब छोटे भाई ने यह फैसला किया कि अब वह इस घर में नहीं रहेगा और वह घर छोड़कर निकल गया और पास में ही एक झोपड़ी बनाकर रहने लगा छोटे भाई के जाने के बाद परिवार में सब को उसकी कमी खटकने लगी पर क्या कर सकते थे सबको उसकी याद आती थी सब चाहते थे कि वह वापस आ जाए साथ लड़ते थे लेकिन प्रेम भी करते थे पर वह इतने गुस्से में था की सब की बात अनसुनी करता था वह किसी का कहना नहीं मानता था कई बार भाभियों ने समझाया कि कि घर वापस आ जाओ पर वह नहीं माना अब थक हार कर वह भी बैठ गई इसी समय उनके घर में दूर के रिश्तेदार आ गए जो काफी वृद्ध थे जब उनको इस घटना का पता चला तो बहुत दुखी हुए और एक योजना बनाई जिससे छोटे भाई को घर वापस लाया जा सके ।
कुछ समय पश्चात घर में फिर लड़ाई हुई अब लड़ाई जब हुई तो बड़ा भाई सब को छोड़कर अपने सबसे छोटे वाले भाई के पास चला गया और पहुंच कर बोला अब उन लोगों से मेरा कोई रिश्ता नहीं है अब मैं तेरे साथ ही रहूंगा समय बीता पत्नी भी आ गई बच्चे भी आ गए अब क्या था अब केवल एक ही परिवार वहां शेष रह गया था उन लोगों में भी आपस में लड़ाई हो गई लड़ाई होने के पश्चात मजले भाई की पत्नी अपने बच्चों को लेकर सबसे छोटे वाले भाई के घर पहुंच गए अब घर में केवल एक ही मजला भाई बचा सारा परिवार उस छोटे भाई के घर पहुंच गया जो पहले नाराज होकर निकल गया था कुछ समय बीता मझला भाई भी वहां पहुंच गया और बोला तुम लोगों के बिना मन नहीं लगता है हम भी यही रहेंगे और सब लोग अब साथ रहने लगे थे छोटे भाई का गुस्सा भी खत्म हो गया था पर केवल घर बदल गया था कुछ समय बाद सब लोग हंसी खुशी से अपने घर वापस आ गए और खुशी खुशी रहने लगे उन्होंने अपने परिवार की अहमियत समझी और जीवन में उसका महत्व समझा एक दिन छोटे भाई ने पूछा कि आप सब मेरे यहां कैसे रहने पहुंच गए तब उन्होंने बताया कि यह चाचा जी की योजना थी जिसके कारण हम सब फिर से मिलकर एक हो गए उन्होंने ही हमको झूठ मूठ की लड़ाई करने की नसीहत दी तब हम लोगों ने तुम्हें वापस लाने की यह योजना बनाई कोई सोच भी नहीं सकता था की कुछ झूठी लड़ाइयों से एक परिवार फिर से एक हो सकता है पर ऐसा हुआ और हो सकता है
कुछ समय पश्चात घर में फिर लड़ाई हुई अब लड़ाई जब हुई तो बड़ा भाई सब को छोड़कर अपने सबसे छोटे वाले भाई के पास चला गया और पहुंच कर बोला अब उन लोगों से मेरा कोई रिश्ता नहीं है अब मैं तेरे साथ ही रहूंगा समय बीता पत्नी भी आ गई बच्चे भी आ गए अब क्या था अब केवल एक ही परिवार वहां शेष रह गया था उन लोगों में भी आपस में लड़ाई हो गई लड़ाई होने के पश्चात मजले भाई की पत्नी अपने बच्चों को लेकर सबसे छोटे वाले भाई के घर पहुंच गए अब घर में केवल एक ही मजला भाई बचा सारा परिवार उस छोटे भाई के घर पहुंच गया जो पहले नाराज होकर निकल गया था कुछ समय बीता मझला भाई भी वहां पहुंच गया और बोला तुम लोगों के बिना मन नहीं लगता है हम भी यही रहेंगे और सब लोग अब साथ रहने लगे थे छोटे भाई का गुस्सा भी खत्म हो गया था पर केवल घर बदल गया था कुछ समय बाद सब लोग हंसी खुशी से अपने घर वापस आ गए और खुशी खुशी रहने लगे उन्होंने अपने परिवार की अहमियत समझी और जीवन में उसका महत्व समझा एक दिन छोटे भाई ने पूछा कि आप सब मेरे यहां कैसे रहने पहुंच गए तब उन्होंने बताया कि यह चाचा जी की योजना थी जिसके कारण हम सब फिर से मिलकर एक हो गए उन्होंने ही हमको झूठ मूठ की लड़ाई करने की नसीहत दी तब हम लोगों ने तुम्हें वापस लाने की यह योजना बनाई कोई सोच भी नहीं सकता था की कुछ झूठी लड़ाइयों से एक परिवार फिर से एक हो सकता है पर ऐसा हुआ और हो सकता है

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