राजनीति में अब भगवान कृष्ण जी आ गए किसी ने टिप्पणी कर कहा की वह रसिया है अर्थात वह भी छेड़खानी करते थे
इस पर एक कथा है जो मैं आपके समक्ष रखना चाहता हूं यह बात उस समय की है जब भगवान राम सीता से विवाह करने हेतु अयोध्या जा रहे थे तब राह में जितनी भी स्त्रियों ने उनको देखा वह उन पर मोहित हो गई और इसी स्वरुप में अपने पति रूप में पाने के लिए प्रार्थना करने लगे कि मुझे भी इस तरह का रूप वाला पति चाहिए तब भगवान ने उन सबकी इच्छा पूर्ति करने का वचन दिया क्यों कि यह अवतार पुरुषोत्तम राम का था तो उनको एक ही विवाह करना था फिर जब भगवान कृष्ण रूप में पृथ्वी पर अवतरित हुए तब उन्होंने हर उस स्त्री को की इच्छा पूर्ति के लिए कार्य किया प्रेम केवल स्पर्शी नहीं होता क्या भाव से भरा हुआ होता है कृष्ण ने अपने जीवन काल में अनेक ऐसी दिव्य घटनाओं का सृजन किया जिससे मानव जीवन का कल्याण हो सके आज भी कई स्त्रियां कृष्ण को अपना प्रेमी या प्रेम मानती हैं मीरा भी थी 1600000 पटरानियों के स्वामी कृष्ण थे पर कभी भी उन्होंने भेद नहीं किया एक बार नारद जी ने सोचा कि कि भगवान कृष्ण की कितनी रानियां हैं तो वह समय कैसे बिताते होंगे सबके साथ यह जानने के लिए नारद जी कृष्ण के महल पहुंच गए और भगवान को ढूंढने लगे वह जिस भी कमरे में जाते वहां कृष्ण एक नए स्वरूप में अपनी रानियों के साथ बैठे मिलते किसी के साथ ठिठोली करते हुए किसी से वार्तालाप करते हुए किसी के साथ नृत्य करते हुए अर्थात कहने का तात्पर्य यह है कि प्रेम के स्वरुप में कृष्ण का जन्म उन्हें स्त्रियों के इच्छा पूर्ति के लिए हुआ जिन्होंने रामावतार में राम के समान वर की इच्छा की थी ।
इस पर एक कथा है जो मैं आपके समक्ष रखना चाहता हूं यह बात उस समय की है जब भगवान राम सीता से विवाह करने हेतु अयोध्या जा रहे थे तब राह में जितनी भी स्त्रियों ने उनको देखा वह उन पर मोहित हो गई और इसी स्वरुप में अपने पति रूप में पाने के लिए प्रार्थना करने लगे कि मुझे भी इस तरह का रूप वाला पति चाहिए तब भगवान ने उन सबकी इच्छा पूर्ति करने का वचन दिया क्यों कि यह अवतार पुरुषोत्तम राम का था तो उनको एक ही विवाह करना था फिर जब भगवान कृष्ण रूप में पृथ्वी पर अवतरित हुए तब उन्होंने हर उस स्त्री को की इच्छा पूर्ति के लिए कार्य किया प्रेम केवल स्पर्शी नहीं होता क्या भाव से भरा हुआ होता है कृष्ण ने अपने जीवन काल में अनेक ऐसी दिव्य घटनाओं का सृजन किया जिससे मानव जीवन का कल्याण हो सके आज भी कई स्त्रियां कृष्ण को अपना प्रेमी या प्रेम मानती हैं मीरा भी थी 1600000 पटरानियों के स्वामी कृष्ण थे पर कभी भी उन्होंने भेद नहीं किया एक बार नारद जी ने सोचा कि कि भगवान कृष्ण की कितनी रानियां हैं तो वह समय कैसे बिताते होंगे सबके साथ यह जानने के लिए नारद जी कृष्ण के महल पहुंच गए और भगवान को ढूंढने लगे वह जिस भी कमरे में जाते वहां कृष्ण एक नए स्वरूप में अपनी रानियों के साथ बैठे मिलते किसी के साथ ठिठोली करते हुए किसी से वार्तालाप करते हुए किसी के साथ नृत्य करते हुए अर्थात कहने का तात्पर्य यह है कि प्रेम के स्वरुप में कृष्ण का जन्म उन्हें स्त्रियों के इच्छा पूर्ति के लिए हुआ जिन्होंने रामावतार में राम के समान वर की इच्छा की थी ।

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